Target Tv Live

बिजनौर में गंगा का कहर: तटबंध खतरे में, 12 गांवों को खाली करने का आदेश, लोगों में दहशत

बिजनौर में गंगा का कहर: तटबंध खतरे में, 12 गांवों को खाली करने का आदेश, लोगों में दहशत

 

गंगा कटान ने बढ़ाया संकट, हर घंटे धंस रहा तटबंध – प्रशासन ने जारी किया अलर्ट, पांच राहत शिविर बनाए गए

ताज़ा हालात – तटबंध पर मंडराता खतरा

बिजनौर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने और कटान तेज होने से बैराज से रावली के बीच बना तटबंध संकट में आ गया है।

  • सोमवार देर रात तटबंध की मिट्टी का बड़ा हिस्सा धंस गया।
  • धंसी हुई मिट्टी पर से गंगा का पानी उतरना शुरू हो गया है।
  • कई जगहों से पानी रिसाव करने लगा है और तटबंध की चौड़ाई घटकर सिर्फ 1–2 मीटर रह गई है।
  • गंगा की मुख्यधारा सीधी तटबंध से टकरा रही है, जिससे उसके टूटने की आशंका और बढ़ गई है।

ग्रामीणों में अफरा-तफरी – पलायन की मजबूरी

जैसे ही तटबंध की मिट्टी धंसने और रिसाव की खबर फैली, आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई।

  • डीएम जसजीत कौर ने वीडियो संदेश जारी कर 12 गांवों के लोगों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया।
  • गांवों में प्रधान और शिक्षकों की मदद से मुनादी कराई जा रही है।
  • लोग अपने घरों से जरूरी सामान, बच्चों और पशुधन को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे।
  • अब तक पांच स्थानों पर राहत और आश्रय शिविर बना दिए गए हैं।
  • ग्रामीणों के चेहरों पर चिंता और भय साफ झलक रहा है।

प्रशासन का एक्शन प्लान

  • मेरठ–पौड़ी हाईवे पर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया
  • तटबंध बचाने के लिए पेड़, रेत के बोरे और बल्लियां डालने का काम लगातार जारी रहा, लेकिन प्रयास नाकाम रहे।
  • मौके पर प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और राहतकर्मी तैनात हैं।
  • आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ की टीम भी सतर्क मोड पर है।

डीएम जसजीत कौर का बयान

“गंगा के तेज बहाव और कटान के चलते तटबंध पर खतरा बढ़ गया है। हमारी कोशिशें जारी हैं, लेकिन टूटने की आशंका प्रबल है। सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित गांवों को खाली कराया जा रहा है और पांच जगहों पर राहत शिविर बनाए गए हैं।”

क्यों गंभीर है खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तटबंध टूटा तो—

  • दर्जनों गांव गंगा के पानी में समा सकते हैं।
  • हजारों लोग बेघर हो जाएंगे।
  • कृषि भूमि और खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद होंगी।
  • मेरठ–पौड़ी हाईवे का संपर्क टूट सकता है।
पृष्ठभूमि – हर साल दोहराता संकट

गंगा किनारे बसे गांव हर साल कटान और बाढ़ की मार झेलते हैं।

  • पिछले साल भी इसी क्षेत्र में गंगा कटान से कई बीघा जमीन नदी में समा गई थी।
  • ग्रामीण लगातार स्थायी समाधान की मांग करते रहे हैं।
  • लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ अस्थायी बचाव कार्य किए जाते हैं, जिनका असर कुछ ही समय तक रहता है।
ग्राउंड रिपोर्ट – भय और बेबसी का माहौल
  • गांवों में सन्नाटा पसर गया है, लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं।
  • महिलाएं बच्चों को गोद में और पुरुष अनाज–पशुधन बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
  • खेतों में खड़ी धान की फसल डूबने के कगार पर है।
  • लोग कह रहे हैं – “हर साल यही हाल होता है, लेकिन स्थायी समाधान कोई नहीं निकालता।”

प्रशासनिक चुनौती और भविष्य

  • गंगा कटान और तटबंध टूटने का खतरा सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं है, यह पूरे गंगा तटीय क्षेत्रों की स्थायी समस्या है।
  • समय रहते अलर्ट और पलायन से जानमाल का नुकसान कम हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान जरूरी है।
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि तटबंधों की मजबूती और गंगा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से स्थायी प्रोजेक्ट की जरूरत है।

 निष्कर्ष:
बिजनौर का यह संकट सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और लापरवाही की कहानी भी है। सवाल यह है कि क्या हर साल लोगों को पलायन और तबाही झेलनी पड़ेगी या सरकार स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी?

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें