आगरा बिजली फ्रेंचाइजी घोटाला! सीएजी रिपोर्ट दबाई गई, अरबों का नुकसान उजागर
टोरेंट पावर करार पर बवाल: सीएजी ने 10 साल पहले ही दी थी रद्द करने की सिफारिस

बिजली कर्मचारियों का बड़ा आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग प्रक्रिया ही शुरू से गलत थी, जिसे सीएजी (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने दस साल पहले अपनी रिपोर्ट में रद्द करने की अनुशंसा की थी। लेकिन रिपोर्ट दबा दी गई और नतीजा यह हुआ कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन को हर साल अरबों रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है।
प्रमुख हाइलाइट्स
- सीएजी ने 2015 की रिपोर्ट में आगरा फ्रेंचाइजी बिडिंग को गलत बताया।
- गलत आंकड़े दिखाकर टोरेंट पावर को सस्ती दरों पर बिजली दी गई।
- पावर कॉरपोरेशन को अब तक 3432 करोड़ का नुकसान, आगे 4601 करोड़ तक पहुंचने की आशंका।
- संघर्ष समिति ने मांग की – करार तत्काल रद्द हो और दोषियों पर उच्च स्तरीय जांच हो।
- 285 दिन से निजीकरण के खिलाफ आंदोलन जारी।
सीएजी की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
संघर्ष समिति ने खुलासा किया कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था –
- आरएफपी (Request for Proposal) में दिए गए आंकड़े भ्रामक थे।
- दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने T&D हानियां और संग्रहण क्षमता के गलत आंकड़े पेश किए।
- 28.22% नुकसान को बढ़ाकर 44.85% दिखाया गया, जबकि संग्रहण क्षमता को कम कर पेश किया गया।
👉 इसका सीधा फायदा टोरेंट पावर को मिला और कॉरपोरेशन को अरबों का नुकसान।
अब तक कितना नुकसान?
- सीएजी ने अनुमान लगाया था कि 18 साल के अनुबंध में 4601 करोड़ का घाटा होगा।
- 14 साल में ही पावर कॉरपोरेशन को 3432 करोड़ रुपए की हानि हो चुकी है।
- यानी टोरेंट पावर को लागत से कम कीमत पर बिजली मिल रही है, जबकि जनता महंगी दरों पर भुगतान कर रही है।
संघर्ष समिति की मांगें
- आगरा फ्रेंचाइजी करार को तत्काल रद्द किया जाए।
- घोटाले में शामिल अधिकारियों और कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया रोकी जाए।
आंदोलन की चेतावनी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने साफ किया है कि:
- 285 दिनों से आंदोलन लगातार जारी है।
- आने वाले दिनों में आगरा फ्रेंचाइजी और नोएडा पावर कंपनी घोटाले पर और खुलासे किए जाएंगे।
- यदि करार रद्द नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।
निचोड़
आगरा बिजली फ्रेंचाइजी का मामला अब सिर्फ बिजलीकर्मियों का आंदोलन नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा बड़ा घोटाला बन चुका है। सवाल ये है कि जब सीएजी ने 2015 में ही चेतावनी दे दी थी, तो उसकी रिपोर्ट को क्यों दबाया गया? और क्या योगी सरकार अब इस अनुबंध को रद्द कर जनता के हित में कदम उठाएगी?











