गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग का कहर: किसानों को सतर्क रहने की सलाह
बिजनौर से कृषि विभाग की चेतावनी, हेल्पलाइन से मिलेगा 48 घंटे में समाधान
बिजनौर, 30 अगस्त 2025।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। गन्ने की फसल में इस समय लाल सड़न रोग (Red Rot Disease) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह रोग गन्ने की उपज को भारी नुकसान पहुँचा सकता है।
लाल सड़न रोग क्या है और कैसे पहचानें?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लाल सड़न गन्ने की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है।
इस रोग के लक्षण इस प्रकार हैं:
- गन्ने की पत्तियों पर लाल रंग के धब्बे बनने लगते हैं।
- धीरे-धीरे पत्तियाँ पीली होकर सूख जाती हैं।
- गन्ने को बीच से चीरने पर लाल रंग दिखाई देता है।
- गन्ने से एल्कोहल जैसी तेज गंध आती है।
👉 यह रोग न केवल फसल की गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि गन्ने की उपज में 30-40% तक की गिरावट ला सकता है।
कृषि विभाग ने बताए नियंत्रण के उपाय
किसानों को सलाह दी गई है कि रोग फैलने से रोकने के लिए तुरंत निम्न कदम उठाएं:
- रोगग्रस्त पौधे उखाड़ें – संक्रमित पौधों को जड़ से उखाड़कर गहरे गड्ढे में दबा दें।
- ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें – प्रभावित स्थान पर रोग फैलने से रोकने के लिए।
- रसायनों का प्रयोग करें –
- एजोक्सीस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाजोल 18.3% एससी → 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव।
- अथवा थायोफिनेट मिथाइल 70% → 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव।
किसान ऐसे प्राप्त कर सकते हैं तुरंत मदद
किसानों की समस्या को समझने और उसका समाधान देने के लिए कृषि विभाग ने हेल्पलाइन सुविधा शुरू की है।
- किसान अपना नाम, ग्राम, विकास खंड, जनपद का नाम लिखकर,
- फसल की फोटो खींचकर,
- मोबाइल नंबर 9452247111 और 9452257111 पर एसएमएस/व्हाट्सएप कर सकते हैं।
👉 कृषि विभाग का दावा है कि किसानों की समस्या का समाधान 48 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
किसानों को क्यों बरतनी चाहिए सावधानी?
- लाल सड़न रोग का संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है।
- अगर शुरुआती अवस्था में रोकथाम न की जाए तो गन्ने की पूरी फसल नष्ट हो सकती है।
- यह रोग गन्ने से बनने वाली चीनी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को चाहिए कि वे:
- फसल का नियमित निरीक्षण करें।
- स्वस्थ और रोगमुक्त बीज का ही प्रयोग करें।
- रोगग्रस्त खेतों में गन्ने की जगह अन्य फसल का चक्र अपनाएं।
- समय-समय पर कृषि विभाग से संपर्क बनाए रखें।
निष्कर्ष
गन्ना उत्तर प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल है और बिजनौर इसका एक बड़ा उत्पादक जिला है। ऐसे में लाल सड़न रोग का प्रकोप किसानों के लिए आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है। कृषि विभाग ने समय पर चेतावनी और समाधान के उपाय बताकर किसानों को राहत देने की कोशिश की है। अब किसानों की सतर्कता और वैज्ञानिक पद्धति ही उनकी फसल को सुरक्षित रख सकती है।










