बड़ी पड़ताल: स्कूल के पास शराब का ठेका, ग्रामीणों ने कहा, “हमारे बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की सुरक्षा खतरे में”
बिजनौर से अवनीश त्यागी की रिपोर्ट
बिजनौर। तहसील नजीबाबाद क्षेत्र के ग्राम जलालपुर करजी के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सीधी चुनौती दे दी है। गांव के लोगों ने एक सामूहिक ज्ञापन देकर सरकारी ठेका शराब को हटाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह ठेका प्राथमिक विद्यालय के ठीक सामने संचालित हो रहा है। सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक शराबियों की भीड़ वहां लगी रहती है, जिससे न केवल शिक्षा का माहौल खराब हो रहा है बल्कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों की आवाज़
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“हमारे छोटे-छोटे बच्चे जब स्कूल आते-जाते हैं तो शराबियों की हरकतों से डर जाते हैं।”
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“महिलाओं और बेटियों के लिए राह चलना मुश्किल हो गया है।”
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“सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है, लेकिन यहां स्कूल के सामने शराब बिक रही है। यह दोहरी नीति नहीं तो और क्या है?”
सामूहिक ज्ञापन, आक्रोश का सबूत
ग्रामीणों ने अंगूठों और हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि अगर ठेका नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि:
- विद्यालय के आसपास का माहौल बिगड़ रहा है।
- शराबियों की वजह से बच्चियां असुरक्षित महसूस करती हैं।
- शिक्षा का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
सवाल प्रशासन से
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क्या किसी भी स्कूल के सामने शराब का ठेका खोला जाना सरकारी नियमों और सामाजिक मर्यादा के अनुरूप है?
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शिक्षा और महिला सुरक्षा को लेकर लगातार दावे करने वाली सरकार की योजनाएँ क्या केवल कागजों में ही सीमित रह गई हैं?
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क्या जिला प्रशासन तुरंत इस पर कार्रवाई करेगा या फिर ग्रामीणों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा?
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
यह विवाद सिर्फ जलालपुर गांव का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सवाल पूरे प्रदेश के शराब ठेका सिस्टम पर उठता है।
- सरकार को शराब से राजस्व मिलता है, लेकिन किस कीमत पर?
- जब ठेका शिक्षा स्थल या धार्मिक स्थल के पास खुलता है तो यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज और भविष्य की पीढ़ी से विश्वासघात है।
- ग्रामीणों का विरोध पूरी तरह जायज़ है क्योंकि गांव का सामाजिक ताना-बाना, बच्चों की शिक्षा और महिलाओं की गरिमा सब दांव पर लगी हुई है।
हाइलाइट्स
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“विद्यालय के सामने शराबियों की भीड़ – बेटियों की सुरक्षा पर संकट”
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“ग्रामीणों का सामूहिक ज्ञापन: ठेका हटाओ वरना आंदोलन होगा”
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“महिलाओं ने उठाई आवाज़ , सड़क से स्कूल तक असुरक्षा का साया”
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“राजस्व बनाम सामाजिक सुरक्षा – प्रशासन किसे चुनेगा?”
जलालपुर काजी का यह मामला साफ संदेश देता है कि ग्रामीण अब खामोश नहीं रहेंगे।
शराब का ठेका यदि शिक्षा और समाज के मूल्यों को चोट पहुँचाता है, तो जनता उठ खड़ी होगी।
अब देखना यह है कि बिजनौर जिला प्रशासन जनता की आवाज़ सुनता है या फिर एक और आंदोलन की नींव पड़ती है











