Target Tv Live

ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पर उठे गंभीर सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज़

  उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण पर बवाल!
ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पर उठे गंभीर सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज़
मुख्य बातें एक नज़र में
  • संघर्ष समिति का आरोप – निजीकरण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं, चुनिंदा घरानों के हित साधे जा रहे

  • ड्राफ्ट SBD-2025 पर सवाल – अभी तक सार्वजनिक नहीं, न मंत्रालय की वेबसाइट पर और न राज्यों को जारी

  • मीटर कंपनियों की लाबीइंग – पूर्व विद्युत सचिव ने उठाए फंडिंग और मिलीभगत के गंभीर प्रश्न

  • 42 जिलों की संपत्तियाँ दांव पर – लाखों करोड़ की बिजली परिसंपत्तियाँ निजी हाथों में जाने की तैयारी

  • 271वें दिन का आंदोलन – प्रदेशभर में बिजली कर्मचारियों का हल्ला बोल जारी

निजीकरण की स्क्रिप्ट पर छाया विवाद

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पूरी प्रक्रिया अस्पष्ट और संदिग्ध है। समिति का कहना है कि “ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025” (SBD-2025) पर आधारित आरएफपी (RFP) दस्तावेज़ के ज़रिए राज्य की 42 ज़िलों की विशाल बिजली संपत्तियाँ निजी हाथों में सौंपने की तैयारी हो रही है, लेकिन यह दस्तावेज़ न तो सार्वजनिक है और न ही किसी स्तर पर आपत्तियाँ आमंत्रित की गई हैं।

ई.ए.एस. शर्मा के सवालों से मचा हड़कंप

अटल बिहारी वाजपेई सरकार में विद्युत सचिव रहे पूर्व आईएएस ई.ए.एस. शर्मा ने ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन को भेजे मेल में कड़ा सवाल उठाया है –
👉 कैसे पूर्व सचिव आलोक कुमार के डिस्कॉम एसोशिएशन से संबंध बन गए, जबकि यह संस्था निजीकरण और स्मार्ट मीटर कंपनियों की पैरवी के लिए कुख्यात है?
👉 क्या डिस्कॉम एसोशिएशन की फंडिंग भी विवादित है? इस पर इन्वेस्टिगेशन ज़रूरी है।

2020 से 2025: दस्तावेज़ बदलने का खेल?

  • पहले तय था कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट, निजीकरण में मदद के लिए ड्राफ्ट SBD-2020 को आधार बनाएंगे।
  • इस दस्तावेज़ पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संगठनों ने लिखित आपत्ति दी थी।
  • लेकिन अचानक 2025 का नया ड्राफ्ट सामने आ गया, जिसे कहीं सार्वजनिक नहीं किया गया
  • समिति का दावा – “यह व्यतिक्रम पारदर्शिता पर गहरा सवाल खड़ा करता है।”

किसान और उपभोक्ता की चिंता

संघर्ष समिति ने कहा कि जब देश का सबसे बड़ा निजीकरण प्रयोग यूपी में किया जा रहा है, तो लाखों उपभोक्ता और किसान अपेक्षा करते हैं कि—

  •  निजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज़ खुले मंच पर आएं
  •  उपभोक्ताओं को भरोसे में लिया जाए
  •  पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए

प्रदेशभर में गूंजा विरोध

निजीकरण विरोधी आंदोलन आज 271वें दिन में प्रवेश कर गया।
विद्युत कर्मचारियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, झांसी, बरेली, अयोध्या, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद, ओबरा, अनपरा समेत प्रदेश के तमाम शहरों में प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाया।

बुलेट ट्रेन विश्लेषण

  • यूपी में निजीकरण का सुपर-एक्सपेरिमेंट – सबसे बड़े पैमाने पर वितरण तंत्र निजी हाथों में
  • ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट की गोपनीयता – संदेह गहराया, पारदर्शिता सवालों के घेरे में
  • राजनीतिक तापमान – विपक्ष और कर्मचारी संगठनों को मिलेगा बड़ा मुद्दा
  • आर्थिक असर – लाखों करोड़ की परिसंपत्तियाँ निजी हाथों में जाने का खतरा
  • जनहित vs प्राइवेट लॉबी – असली जंग “नियंत्रण” की है

संघर्ष समिति की मांग

👉 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल हस्तक्षेप करें
👉 SBD-2025 और सभी निजीकरण दस्तावेज़ों को पब्लिक डोमेन में जारी किया जाए
 फंडिंग और एसोशिएशन की स्वतंत्र जांच कराई जाए

निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण की प्रक्रिया अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। पारदर्शिता की मांग जितनी अनसुनी होगी, आंदोलन उतना ही तेज़ होगा।

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें