झारखंड की महिलाएं बांस से लिखेंगी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
देवघर-दुमका में सम्पन्न हुआ 4 दिवसीय बांस मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण, स्वरोजगार और स्थानीय उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मुख्य बिंदु
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स्वशक्त परियोजना के तहत 20–23 अगस्त 2025 को मधुबाडीह (देवघर) में प्रशिक्षण सम्पन्न।
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देवघर और दुमका जिलों से आए 10 मास्टर ट्रेनरों ने लिया हिस्सा।
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विशेषज्ञ प्रशिक्षक – दुमका, रामगढ़ और असम से आमंत्रित।
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प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर आगे चलकर मोहली समुदाय की महिलाओं को देंगे प्रशिक्षण।
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बांस उत्पाद निर्माण से स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और आय वृद्धि पर जोर।
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कार्यक्रम का आयोजन NEEDS संगठन ने किया।
बांस: सिर्फ पेड़ नहीं, जीवन का सहारा
भारत में बांस को “गरीब आदमी की लकड़ी” कहा जाता है, लेकिन आज यह ग्रीन गोल्ड (Green Gold) बन चुका है।
- भारत दुनिया में दूसरे नंबर का सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है।
- झारखंड में बांस से जुड़े पारंपरिक शिल्पकार समुदाय लंबे समय से टोकरी, दरी, डलिया जैसी वस्तुएं बनाते रहे हैं।
- वैश्विक बाजार में बांस उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है – फर्नीचर, डेकोरेटिव आइटम्स, यहां तक कि कपड़े और पेपर इंडस्ट्री तक।
इसी बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर स्वशक्त परियोजना के तहत महिलाओं को बांस उत्पाद निर्माण की आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है।
महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव
मोहली समुदाय की महिलाएं अब तक खेती-किसानी या मजदूरी पर निर्भर रहती थीं।
प्रशिक्षण के बाद –
- वे बांस से आधुनिक हस्तशिल्प व घरेलू सजावटी सामान बनाएंगी।
- स्थानीय मेलों और हाट-बाजार में इनका विपणन होगा।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सरकारी योजनाओं के जरिए इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।
इससे न सिर्फ महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान भी मिलेगा।
प्रशिक्षण स्थल और विशेषज्ञ
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प्रशिक्षण नीड्स ट्रेनिंग सेंटर, मधुबाडीह (देवघर) में हुआ।
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विशेषज्ञ प्रशिक्षक रामगढ़, दुमका और असम से बुलाए गए, क्योंकि असम भारत का प्रमुख बांस उत्पादक राज्य है और वहां की तकनीक काफी उन्नत है।
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10 मास्टर ट्रेनरों को बांस काटने, प्रोसेसिंग, डिज़ाइनिंग और प्रोडक्ट मार्केटिंग की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग
- जयंतो चौधरी – कार्यक्रम प्रबंधक
- मनीष कुमार पांडे, दानिश कमर, रंजीत महतो – परियोजना से जुड़े प्रमुख सदस्य
- NEEDS संगठन की पूरी टीम
इनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी सशक्त बनाया।
विश्लेषण: क्यों है यह पहल अहम?
- ग्रामीण रोजगार की राह – बांस आधारित उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करेगा।
- महिला सशक्तिकरण – महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित न रहकर आर्थिक योगदानकर्ता बनेंगी।
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग – झारखंड में बांस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिससे कच्चा माल दूर से मंगाने की जरूरत नहीं होगी।
- पर्यावरण संरक्षण – बांस सबसे तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, इससे वनों पर दबाव भी कम होगा।
- बाजार से जुड़ाव – हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर और डेकोर की अंतरराष्ट्रीय डिमांड ग्रामीण महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकती है।
📞 संपर्क सूत्र
NEEDS संगठन, देवघर
☎️ 9324976012
स्वशक्त परियोजना के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण सिर्फ चार दिन की कार्यशाला नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में आत्मनिर्भरता की नई क्रांति है।
बांस उत्पाद निर्माण से महिलाएं न केवल रोजगार पाएंगी, बल्कि आने वाले वर्षों में झारखंड के बांस उद्योग को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान भी दिला सकती हैं।
“जब महिलाएं हाथों में बांस लेकर हुनर गढ़ेंगी, तब झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी होगी।”

देवघर-दुमका में सम्पन्न हुआ 4 दिवसीय बांस मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण, स्वरोजगार और स्थानीय उद्योग को मिलेगा बढ़ावा









