बिजनौर के अंश डवास ने रचा इतिहास: एशियन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण और कांस्य पदक
ग्राम शादीपुर मिलक के युवा शूटर ने पहली बार जिले को दिलाए अंतर्राष्ट्रीय मेडल, खेल जगत में खुशी की लहर
रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
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स्थान: बिजनौर जनपद, विकास खंड नूरपुर, ग्राम शादीपुर मिलक
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इवेंट: एशियन चैंपियनशिप, शिमकेंट (कजाकिस्तान)
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उपलब्धि:
- 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट → स्वर्ण पदक
- व्यक्तिगत इवेंट → कांस्य पदक
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ऐतिहासिक क्षण:
- बिजनौर के इतिहास में पहली बार किसी शूटर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ दो मेडल जीते।
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प्रोत्साहन: पिता संजीव डवास, कोच आकाश कुमार व परिवार का योगदान
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बधाई संदेश: खेल प्रेमियों, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, विवेकानंद दिव्य भारती, जिला व्यायाम शिक्षक, खेल परिवार यूट्यूब चैनल आदि ने दी शुभकामनाएं।
अंश डवास की जीत का महत्व
बिजनौर के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक है। आज तक जिले से किसी भी शूटर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल नहीं जीता था। अंश ने एक साथ दो मेडल जीतकर जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया।
अंश का सफर: संघर्ष से सफलता तक
- शुरुआत: आर.आर. पब्लिक स्कूल और किसान शूटिंग रेंज से की ट्रेनिंग।
- मार्गदर्शन:
- स्कूल प्रबंधक मनुजेन्द्र, प्रधानाचार्य प्रमन्यु गुप्ता, उपप्रधानाचार्य टीकम सिंह का प्रोत्साहन।
- कोच आकाश कुमार, परवेन्द्र सिंह (अलवर), और दीक्षांत (कर्णी सिंह शूटिंग अकादमी, दिल्ली) का मार्गदर्शन।
- अब तक की उपलब्धि: राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में लगभग 100 मेडल व ट्रॉफी।
- पारिवारिक योगदान: पिता संजीव डवास (फिजिकल एजुकेशन शिक्षक) ने मध्यम आय होने के बावजूद हर सुविधा उपलब्ध कराई।
बधाई और प्रतिक्रियाएं
- कोच आकाश कुमार: “अंश में शुरू से ही क्षमता थी, हमें विश्वास था कि वह देश का नाम रोशन करेगा।”
- पिता संजीव डवास: “इस उपलब्धि में सरकार की खेल प्रोत्साहन नीति का भी बड़ा योगदान है।”
- जिला खेल प्रेमी: अंश की सफलता से जिले में नई खेल ऊर्जा का संचार।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
अंश डवास की कामयाबी न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि यह गांव और छोटे जिलों से निकलने वाली खेल प्रतिभाओं की नई कहानी है। सीमित संसाधनों और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि के बावजूद, संजीव डवास जैसे पिता और समर्पित कोचों ने साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति और लगन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई जा सकती है।
इस उपलब्धि से न केवल बिजनौर बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं को शूटिंग जैसे खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
अंश डवास की यह ऐतिहासिक जीत सिर्फ खेल के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि गांव से उठकर भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमका जा सकता है। अब जिले और प्रदेश की निगाहें इस युवा शूटर पर होंगी, जो आने वाले समय में ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक ला सकता है।
यह खबर सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं बल्कि संघर्ष, समर्पण और नई पीढ़ी की प्रेरणा की कहानी है।













