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“सिर्फ़ गन्ना नहीं, अब स्वास्थ्य-सड़क-तटबंध पर भी भाकियू की आवाज़ बुलंद”

“सिर्फ़ गन्ना नहीं, अब स्वास्थ्य-सड़क-तटबंध पर भी भाकियू की आवाज़ बुलंद”

गन्ना समिति में हुई पंचायत, बाढ़, सड़क, मुआवज़ा, स्वास्थ्य और गंगा तटबंध निर्माण पर किसानों ने रखी मांगें

 पंचायत का सार

  • आयोजन स्थल: गन्ना समिति, बिजनौर

  • अध्यक्षता: जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान

  • संचालन: विजय पहलवान

  • प्रमुख उपस्थिति: मनप्रीत सिंह, विजयपाल सिंह, महेंद्र सिंह, विनीत चौधरी, बलजीत सिंह, डॉक्टर धर्मवीर सिंह समेत दर्जनों किसान नेता

  • ज्ञापन: 3 अलग-अलग ज्ञापन डीएम बिजनौर को सौंपे गए

 बाढ़ प्रभावित किसानों की पुकार

  • जलीलपुर व अफजलगढ़ क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित किसान-मजदूरों को सरकार से राशन व स्कूली बच्चों के लिए वाहन सुविधा दिलाने की मांग।
  • फसलों और मकानों के नुकसान का त्वरित सर्वे कर मुआवजा दिलाया जाए।
  • चांदपुर विधानसभा क्षेत्र में जहानाबाद से नारनौल तक गंगा तटबंध निर्माण की मांग, जिससे हर साल होने वाले नुकसान से किसानों को राहत मिल सके।

 जर्जर सड़कें बनी जानलेवा

  • चांदपुर-बासटा मार्ग गड्ढों में तब्दील, आए दिन दुर्घटनाएं।
  • किसानों ने इसे अत्यावश्यक आधार पर मरम्मत कराने की मांग की।
  • बिजनौर-नगीना रोड पर शादीपुर बरूकी एमपीएस स्कूल के पास पुलिया टूटी, जिसके कारण 100 बीघा से अधिक फसल जलमग्न।

 मुआवज़े की अधूरी कहानी

  • अफजलगढ़ क्षेत्र में पिलीढेम परियोजना के लिए ली गई जमीन का मुआवजा अब तक कई किसानों को नहीं मिला।
  • किसानों ने मांग रखी कि जिनको मुआवज़ा नहीं मिला है उन्हें “जमीन के बदले जमीन” दी जाए।

 ग्राम समाज की भूमि पर कब्ज़ा

  • मोहम्मदपुर देवमल के गुजरपुर जसपाल और ढोकलपुर के बीच ग्राम समाज की ज़मीन पर पड़ी झुग्गियां गंदगी और बीमारी का कारण।
  • किसानों ने प्रशासन से इन्हें तत्काल हटाने की मांग की।

 थैलेसीमिया मरीजों की जंग

किसानों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर चिंता जताई। मांगें:

  1. अलग वार्ड की व्यवस्था।
  2. निको फिल्टर मशीन उपलब्ध कराई जाए।
  3. थैलेसीमिया मरीजों को 100% दिव्यांग प्रमाणपत्र मिले।
  4. आवश्यक दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
  5. निजी ब्लड बैंकों से मुफ़्त ब्लड उपलब्ध कराया जाए।
  6. बाहर से लाए गए ब्लड को चढ़ाने की अनुमति दी जाए।

 विश्लेषण

भारतीय किसान यूनियन की यह पंचायत सिर्फ़ कृषि समस्याओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क, स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे की दिक़्क़तें भी मुख्य एजेंडे में शामिल रहीं।

  • बाढ़ और तटबंध निर्माण की मांगें यह संकेत देती हैं कि किसान प्राकृतिक आपदाओं से लगातार जूझ रहे हैं।
  • सड़क और पुलिया सुधार का मुद्दा बताता है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी से किसान सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
  • वहीं, थैलेसीमिया मरीजों के लिए आवाज़ उठाकर भाकियू ने सामाजिक सरोकार को भी केंद्र में रखा।

भाकियू की मासिक पंचायत में उठी मांगें इस बात का सबूत हैं कि किसान संगठन अब केवल गन्ने के भुगतान या कृषि नीति तक सीमित नहीं, बल्कि जन-जन के मुद्दों को लेकर भी मजबूत भूमिका निभा रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर कितना त्वरित और ठोस कदम उठाता है।

 

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