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किसानों-मजदूरों की आवाज़: 29 अगस्त को बिजनौर कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन

किसानों-मजदूरों की आवाज़: 29 अगस्त को बिजनौर कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट | Target TV Live

 हाइलाइट्स

  • किसान मजदूर संगठन ने 29 अगस्त को किया धरना-प्रदर्शन का ऐलान

  • डीएम कार्यालय बिजनौर पर होगा प्रदर्शन, अनुमति हेतु आवेदन पत्र सौंपा

  • संगठन का दावा: प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होगा

  • किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर आंदोलन

 धरना-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

किसान मजदूर संगठन, बिजनौर लंबे समय से किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर संघर्षरत है। संगठन का कहना है कि बार-बार संबंधित विभागों को ज्ञापन और मांग पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसी कड़ी में संगठन ने निर्णय लिया है कि 29 अगस्त 2025 को जिला अधिकारी कार्यालय, बिजनौर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

 क्या हैं संगठन की मांगें?

  • किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारंटी कानून बने।
  • मजदूरों के लिए रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
  • बेरोजगार युवाओं को नौकरी और प्रशिक्षण अवसर दिए जाएं।
  • बिजली, पानी और कृषि से जुड़े मुद्दों पर तुरंत राहत पैकेज लागू किया जाए।

 संगठन का पक्ष

संगठन के पदाधिकारियों—मुकेश कुमार, मूलचन्द जी, रामकुमार, ललित कुमार, अर्जुन सिंह और ओमप्रकाश—ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा।
उनका कहना है कि –

“हम केवल अपनी समस्याओं की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। कानून-व्यवस्था में कोई व्यवधान नहीं होगा।”

 धरना-प्रदर्शन का विवरण

  • तारीख: 29 अगस्त 2025

  • स्थान: जिला अधिकारी कार्यालय, बिजनौर

  • आयोजक: किसान मजदूर संगठन, बिजनौर

  • मुख्य सहभागी: जिलेभर से किसान, मजदूर और बेरोजगार युवा

 प्रशासन के सामने चुनौती

धरना-प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ सकती है। हालांकि, संगठन ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव नहीं होगा
फिर भी, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने से ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

किसान मजदूर संगठन का यह प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन बिजनौर की राजनीति और प्रशासनिक हलचल का बड़ा केंद्र बन सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन अनुमति देता है या नहीं, और यदि देता है तो शासन-प्रशासन आंदोलनकारियों की मांगों पर कितना गंभीर रुख अपनाता है।

 

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