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“आंकड़े सुधरे, घाटा घटा… फिर भी निजीकरण? कर्मियों ने खड़ा किया सवाल”

“आंकड़े सुधरे, घाटा घटा… फिर भी निजीकरण? कर्मियों ने खड़ा किया सवाल”

“बिजली निजीकरण पर संग्राम, कर्मियों ने काकोरी की 100वीं वर्षगांठ को बनाया आंदोलन का मंच”

हाइलाइट्स

  • सुधार के बीच निजीकरण का फैसला, कर्मियों का सवाल – “जब सब ठीक चल रहा है तो बदलाव क्यों?”
  • प्रदेशभर में तिरंगा रैली, 25+ शहरों में हजारों बिजली कर्मियों का एकजुट प्रदर्शन।
  • पॉवर कारपोरेशन पर आरोप – घाटे का आंकड़ा फर्जी, किसानों-बुनकरों की सब्सिडी को घाटा दिखाया।
  • आंकड़े बोलते हैं – 8 साल में एटीएंडसी हानियां 42% से घटकर 15% (राष्ट्रीय मानक)।
  • सरकार पर दबाव – विज़न 2047 में सुधार की सराहना, फिर निजीकरण का औचित्य क्या?
 लखनऊ से लेकर वाराणसी तक बिजली कर्मियों का जलवा

लखनऊ:

  • हाईडिल फील्ड हॉस्टल से काकोरी क्रांति स्मारक तक तिरंगा लहराते बिजली कर्मियों का हुजूम।
  • नारों की गूंज – “विकसित भारत के लिए सार्वजनिक बिजली जरूरी”, “निजीकरण बंद करो”.
  • प्रेरणा – काकोरी क्रांति के 100 साल पूरे, आंदोलन को आजादी के इतिहास से जोड़ने की कोशिश।

प्रदेशभर का माहौल:

  • वाराणसी, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, झांसी, बरेली, मथुरा, नोएडा, गाजियाबाद… हर जगह बिजली कर्मियों का हुंकार।
  • हाथों में तख्तियां – “निजीकरण का निर्णय निरस्त करो”, “जनता को महंगी बिजली से बचाओ”.
क्यों उबल रहे हैं बिजली कर्मी ?
  • निजीकरण के बाद भी सरकार पर वित्तीय भार – निजी कंपनियों को सस्ती बिजली देनी होगी, सब्सिडी और मदद जारी रहेगी।
  • फर्जी घाटे का खेल – किसानों, बुनकरों की सब्सिडी और सरकारी विभागों के बकाये को घाटे में जोड़कर पेश किया जा रहा है।
  • उपलब्धियां – 3.63 करोड़ उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली, सीमित संसाधनों में कामयाबी, हानियों में रिकॉर्ड गिरावट।

बिग पिक्चर

बिजली कर्मियों का आंदोलन अब सिर्फ रोजगार या पॉलिसी तक सीमित नहीं, इसे राष्ट्रीय अस्मिता और जनहित से जोड़ा जा रहा है।
विजन 2047 में सुधार के सरकारी दावे और निजीकरण की जिद के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक तूफान बन सकता है।

 

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