बिजनौर में कृषि अनुदान घोटाले का खुलासा

गुप्ता मशीनरी स्टोर के मालिक पर किसानों से लाखों की ठगी का आरोप — 100% अनुदान दिलाने का झांसा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ सबूत के रूप में पेश
बिजनौर | 11 अगस्त 2025। बिजनौर के किसानों के लिए चलाई जा रही सरकारी अनुदान योजना में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। गुप्ता मशीनरी स्टोर के मालिक पर आरोप है कि उन्होंने किसानों को 40%, 50% और यहां तक कि 100% अनुदान दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की वसूली की। मामला अब पुलिस और प्रशासन के रडार पर है।
कैसे खुला मामला?
शिकायतकर्ता ने थाने में दी तहरीर में बताया कि कृषि विभाग और ड्राइप कार्यालय बिजनौर के माध्यम से संचालित योजना 3090 का हवाला देकर किसानों को लुभाया गया।
- किसानों से कहा गया कि वे टोकन मनी (₹2,500 से ₹5,000) जमा करें।
- एडवांस के तौर पर ₹20,000 से ₹25,000 तक वसूले गए।
- वादे किए गए कि डीएम और सीडीओ के हस्ताक्षर के साथ 100% अनुदान दिलाया जाएगा।
जांच में क्या मिला?
शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग, किसानों के बयान और लिखित शिकायत भी दी गई। सबूतों से यह सामने आया कि—
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किसानों के नाम पर फर्जी सदस्यता पत्र तैयार किए गए।
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बिना क्लस्टर आवेदन के किसानों को योजना में शामिल किया गया।
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सरकारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर उनकी साख धूमिल करने की कोशिश की गई।
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सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर झूठे प्रचार संदेश चलाए गए।
किसानों का आरोप
कई किसानों ने बताया कि गुप्ता मशीनरी स्टोर से कॉल कर उन्हें भरोसा दिलाया गया कि “आपको पूरा अनुदान मिलेगा”। लेकिन पैसा लेने के बाद कोई लाभ नहीं मिला। कुछ किसानों ने यह भी कहा कि पहले भी इनके द्वारा इस तरह की ठगी हो चुकी है।
कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल धोखाधड़ी नहीं बल्कि—
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जालसाजी
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जाली दस्तावेज़ का इस्तेमाल
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सरकारी योजना में हेराफेरी
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आपराधिक षड्यंत्रजैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है।उन्होंने अनुरोध किया कि संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन का रुख
जिला प्रशासन ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। किसानों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा गया है कि—
“सरकारी योजनाओं का लाभ केवल विभागीय चैनल के माध्यम से ही लें। किसी भी व्यक्ति या निजी संस्था के झांसे में न आएं।”
विश्लेषण
यह मामला केवल एक दुकान या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भरोसे के संकट का प्रतीक है। जब किसान सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगे जाते हैं, तो यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करता है बल्कि सरकार की विकास योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़े करता है। यह आवश्यक है कि—
- ऐसे मामलों की त्वरित जांच हो।
- किसानों के लिए पारदर्शी आवेदन और भुगतान प्रक्रिया लागू की जाए।
- दोषियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हेराफेरी करने की हिम्मत न करे।










