उत्तर प्रदेश बनेगा ग्लोबल फुटवियर हब? मुख्यमंत्री योगी ने MSME और निर्यात प्रोत्साहन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए संकेत

लखनऊ, 01 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए ‘फुटवियर, लेदर एवं नॉन-लेदर क्षेत्र’ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ठोस नीतिगत कदमों का ऐलान किया। प्रस्तावित ‘उत्तर प्रदेश फुटवियर, लेदर एवं नॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति 2025’ के मसौदे पर चर्चा करते हुए उन्होंने क्लस्टर आधारित विकास, अधोसंरचना सुविधाएं, स्किलिंग और निजी निवेश को बढ़ावा देने जैसे बिंदुओं पर विशेष बल दिया।
मुख्य हाइलाइट्स :
✅ फुटवियर और लेदर सेक्टर को ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार करने की योजना
उत्तर प्रदेश को ‘फुटवियर राजधानी’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में व्यापक रणनीति। आगरा, कानपुर और उन्नाव जैसे औद्योगिक केंद्रों की क्षमताओं का दोहन।
✅ 22 लाख नई नौकरियों का लक्ष्य
प्रस्तावित नीति के माध्यम से आने वाले वर्षों में राज्य में लगभग 22 लाख रोजगार अवसर सृजित किए जाने की संभावना।
✅ फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स और क्लस्टर मॉडल पर ज़ोर
औद्योगिक इकाइयों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल अपनाने का सुझाव। क्लस्टर आधारित विकास से स्थानीय निवेश और रोज़गार को मिलेगा बढ़ावा।
✅ सहायक इकाइयों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
फुटवियर से जुड़ी छोटी इकाइयों जैसे बकल्स, ज़िप्स, सोल्स, इनसोल्स, डाइज, लेबल्स आदि के निर्माण को मिलेगा समर्थन।
✅ मशीनरी निर्माण को मिलेगा प्रोत्साहन
चमड़ा सिलाई, कटिंग, मोल्डिंग और सेफ्टी शूज़ जैसी तकनीकों से जुड़ी इकाइयों को सहयोग की घोषणा।
✅ ‘डिज़ाइन टू डिलीवरी’ मॉडल की परिकल्पना
फुटवियर सेक्टर में डिज़ाइन, अनुसंधान, उत्पादन और प्रशिक्षण का एकीकृत ढांचा विकसित करने का प्रयास।
✅ स्किलिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर रणनीतिक ज़ोर
बेहतर उत्पादों के लिए स्किल डेवलपमेंट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की ब्रांडिंग तक की पूरी चेन मजबूत करने की योजना।
औद्योगिक आस्थान नीति: निवेशकों के लिए स्पष्ट रास्ता
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक भूखंडों की पारदर्शी आवंटन प्रणाली की बात करते हुए बताया कि:
- ई-नीलामी या अन्य पारदर्शी तरीकों से भूमि आवंटन
- लीज रेंट मॉडल से निवेशकों का पूंजीगत व्यय घटेगा
- एंकर यूनिट्स को विशेष दरों पर भूमि उपलब्ध
- स्टाम्प ड्यूटी में छूट और बिजली-लॉजिस्टिक सब्सिडी जैसी सुविधाएं सुनिश्चित होंगी
डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की ओर
- सिंगल विंडो अनुमोदन प्रणाली
- ऑनलाइन आवेदन और प्रोत्साहन वितरण प्रणाली की घोषणा
- निवेशकों के लिए सरल, ट्रैक योग्य और उत्तरदायी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का वादा
विश्लेषण: क्या यूपी बन सकता है अगला फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग हब?
उत्तर प्रदेश सरकार की यह रणनीति यदि ज़मीन पर उतरी तो यह राज्य को सिर्फ चमड़ा उद्योग में ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के बड़े नक्शे पर भी स्थापित कर सकती है। पारंपरिक कौशल, संसाधनों की उपलब्धता और माकूल नीति समन्वय से राज्य “डिज़ाइन टू डिलीवरी” की पूरी उत्पादन श्रृंखला को खुद में समेट सकता है।
लेकिन चुनौती होगी – नीति का जमीनी क्रियान्वयन, स्किलिंग के लिए कुशल ट्रेनिंग नेटवर्क और MSMEs के लिए सुलभ फाइनेंसिंग मॉडल तैयार करना।
यह रिपोर्ट Target TV Live डिजिटल डेस्क द्वारा तैयार की गई है।










