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भाकियू (टिकैत) ने प्रशासन को दी अंतिम चेतावनी, 14 जुलाई को दिए मांगपत्र पर नहीं हुई कार्यवाही

 किसान आंदोलन की चेतावनी: 13 अगस्त को बिजनौर में तिरंगा रैली, अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने प्रशासन को दी अंतिम चेतावनी, 14 जुलाई को दिए मांगपत्र पर नहीं हुई कार्यवाही

बिजनौर | गन्ना समिति परिसर।                                        रिपोर्ट : अवनीश त्यागी 

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की एक आपातकालीन बैठक रविवार को गन्ना समिति प्रांगण, बिजनौर में आयोजित हुई। इस अहम पंचायत की अध्यक्षता भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने की, जबकि संचालन मुख्य महासचिव विजय पहलवान ने किया। बैठक में संगठन ने प्रशासन की उदासीनता पर गहरा आक्रोश जताया और आगामी 13 अगस्त को जिला मुख्यालय पर तिरंगा यात्रा एवं संभावित अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की।

मुख्य बिंदु | किसान पंचायत की चेतावनी भरी रणनीति

14 जुलाई के मांगपत्र की अनदेखी
– बैठक में बताया गया कि 14 जुलाई को एसडीएम बिजनौर को सौंपे गए मांगपत्र के एक भी बिंदु पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
– किसान नेताओं ने इसे प्रशासन की “लापरवाही और दुर्भावना पूर्ण मंशा” बताया।

✅ आरटीओ और तहसील स्तर पर खुलेआम भ्रष्टाचार
– बैठक में आरटीओ दफ्तरों और तहसीलों में लाइसेंस व फिटनेस के नाम पर हो रही “खुली लूट” का मुद्दा उठाया गया।
– आरोप लगाया गया कि कुछ अधिकारी जानबूझकर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे हैं।

✅ 13 अगस्त को ‘तिरंगा यात्रा’ और आंदोलन की घोषणा
– यदि प्रशासन ने मांगपत्र पर ठोस कार्यवाही नहीं की, तो 13 अगस्त को किसान हजारों ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाकर जिला मुख्यालय की ओर कूच करेंगे।
– उसी दिन से कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।

✅ प्रशासन से संयम की परीक्षा न लेने की चेतावनी
– जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने कहा, “जिम्मेदार अधिकारी हमारे धैर्य की परीक्षा न लें। किसान मजबूर होकर सड़कों पर उतरेंगे।”
– वक्ताओं ने चेताया कि “आंदोलन हमारा अधिकार है, और अब चुप्पी नहीं रहेगी।”

पंचायत में इन किसान नेताओं ने दी उपस्थिति व समर्थन

मनप्रीत सिंह, उपमा चौहान, विजय पहलवान, अमित बालियान, रामावतार सिंह, कुलदीप सिंह, दिनेश कुमार, बाबूराम तोमर, नरदेव, गजेंद सिंह, विजय चौधरी, देवदत्त शर्मा, मुनेंद्र काकरान, बलजीत सिंह, विनीत मौर्य, संदीप त्यागी, मुकेश जंघाला, पंकज शेरावत, आशु चौधरी, मुनेश अहलावत, शुभम चौधरी, ऋषिपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, प्रमोद कुमार, हनीफ अहमद, रजनीश सूर्य बालियां, वीकार अहमद, मोनू प्रधान, सतपाल सिंह, मोहम्मद याकूब, आकाश चौधरी, सरताज, अमरदीप सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विश्लेषण | तिरंगा के सहारे सड़क से सत्ता तक दबाव

भाकियू टिकैत की यह रणनीति केवल मांगों तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में किसानों के बड़े राजनीतिक दबाव की बुनियाद बन सकती है। तिरंगा यात्रा के रूप में प्रतीकात्मक लेकिन सशक्त विरोध प्रदर्शन का आह्वान, आंदोलन को राष्ट्रीय भावना से भी जोड़ने का प्रयास है। अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता, तो बिजनौर आंदोलन की एक नई गर्म जमीन बन सकता है।

जनहित में सवाल – कब जागेगा प्रशासन?
क्या एसडीएम बिजनौर और जिला प्रशासन समय रहते किसानों की मांगों को सुनेंगे? या फिर 13 अगस्त को बिजनौर की सड़कों पर तिरंगा लेकर ट्रैक्टरों की गूंज, एक नए संघर्ष का आगाज़ करेगी?

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