चित्रकूट में ईको टूरिज्म पार्क: धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में पर्यटन को नई दिशा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 11.77 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ईको टूरिज्म थीम पार्क की नींव रखी जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने और इको-फ्रेंडली पर्यटन को बढ़ावा देना है।
प्राकृतिक पर्यटन और जैव विविधता का संगम
उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, यह पार्क न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाएगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देगा। 7 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले इस पार्क में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ जैव विविधता को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पार्क रानीपुर टाइगर रिजर्व के निकट बनाया जाएगा, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक आकर्षक स्थल बनेगा।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक अभिनव प्रयास
पर्यटन मंत्री के अनुसार, इस पार्क में पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें इको लॉजेज, सुगंधित उद्यान, फूड कोर्ट, जलाशय, केंद्रीय लॉन और बच्चों के लिए प्ले एरिया शामिल होंगे। इसके अलावा, प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष पौधारोपण क्षेत्र भी विकसित किया जाएगा। रोमांच प्रेमियों के लिए एडवेंचर प्ले जोन की व्यवस्था की जाएगी, जहां वे रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
इस पार्क के निर्माण से न केवल चित्रकूट आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पार्क में नेचर ट्रेल, बांस उद्यान और विशेष वॉकिंग ट्रैक भी विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यटक स्वास्थ्यवर्धक अनुभव प्राप्त कर सकें।
सरकार की इको-फ्रेंडली पहल
सरकार द्वारा इस तरह की पहल से पर्यावरण-संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन के क्षेत्र में एक नया उदाहरण स्थापित होगा। रॉक गार्डन, तितली उद्यान और अत्याधुनिक एंफीथिएटर जैसी विशेष संरचनाएं इसे एक अनूठा पर्यटन स्थल बनाएंगी। मंत्री जयवीर सिंह ने विश्वास जताया कि यह पार्क देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा और चित्रकूट को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
चित्रकूट में ईको टूरिज्म पार्क का निर्माण धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यटन को नई गति मिलेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश में सतत और इको-फ्रेंडली पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास साबित हो सकती है।











