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मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के प्रतीक चिन्ह के लिए प्रतियोगिता का आयोजन

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के प्रतीक चिन्ह के लिए प्रतियोगिता का आयोजन

 


BALRAMPUR. देवीपाटन मंडल के जनपद बलरामपुर में निर्माणाधीन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के प्रतीक चिन्ह (लोगो) के चयन के लिए एक विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। प्रेस वार्ता में एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर के प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन पांडेय और अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रमोद कुमार भी उपस्थित थे।

प्रतियोगिता के दिशा-निर्देश जारी
प्रतियोगिता में केवल मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक एवं विद्यार्थी ही भाग ले सकते हैं। इसके लिए प्रतिभागी का बलरामपुर जिले का निवासी होना अनिवार्य है। प्रतिभागियों को अपनी डिजाइन में केवल तीन रंगों का उपयोग करना होगा और इसे ए4 साइज के पेज पर तैयार करना होगा। डिजाइन में विश्वविद्यालय के लिए एक संस्कृत सूत्र वाक्य होना आवश्यक है, जो सरल और पढ़ने में आसान हो।

पुरस्कार और चयन प्रक्रिया
प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर एक चयन समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रतिभागियों के डिजाइन की समीक्षा कर प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के विजेताओं का चयन करेगी।

प्रथम पुरस्कार: ₹5000

द्वितीय पुरस्कार: ₹3000

तृतीय पुरस्कार: ₹2000

सभी विजेताओं को नकद पुरस्कार के साथ प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

प्रतिभागिता के लिए आवश्यक जानकारी
डिजाइन जमा करने वाले प्रतिभागी को अपनी कक्षा, नाम, मोबाइल नंबर और संबंधित विद्यालय या महाविद्यालय का नाम डिजाइन के पीछे लिखना होगा। इसके साथ ही परिचय पत्र की एक फोटो कॉपी संलग्न करना अनिवार्य है। डिजाइनों को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से संबंधित संस्थान में जमा करना होगा।

दिसंबर 2025 तक होगा विश्वविद्यालय का उद्घाटन
कुलपति प्रो. रविशंकर ने बताया कि मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य बलरामपुर के ग्राम कोयलिया छिटइपुर में लगभग 52-53 एकड़ क्षेत्र में हो रहा है। विश्वविद्यालय का कार्यालय घूघूरपुर में बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालय के लिए एक सांस्कृतिक गीत का चयन भी किया जाएगा, जो क्षेत्रीय संस्कृति पर आधारित होगा।

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति ने 3 दिसंबर 2024 को पदभार ग्रहण किया था। उनके अनुसार, यह विश्वविद्यालय दिसंबर 2025 तक तैयार हो जाएगा, जिससे बलरामपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं साकार होंगी।

 

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