Target Tv Live

राम मंदिर की नींव के सबसे मजबूत पत्थर थे अशोक सिंघल: बिजनौर में सतीश महाना ने क्यों कही ये बात?

अशोक सिंघल राम मंदिर आंदोलन की नींव के सबसे मजबूत पत्थर थे: सतीश महाना 

     बिजनौर में जन्मशताब्दी समारोह का उद्घाटन

    बाइट: सतीश महाना, विधानसभा अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश

बिजनौर में बोले विधानसभा अध्यक्ष—अशोक सिंघल ने देश की संस्कृति और संस्कारों को जिया; मीडिया की जिम्मेदारी सुनी-सुनाई बातों के साथ वास्तविकता सामने लाना भी

बिजनौर | अवनीश त्यागी, Target TV Live

बिजनौर में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका को याद करते हुए कहा कि अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर की नींव के सबसे मजबूत पत्थर अशोक सिंघल थे। उन्होंने कहा कि सिंघल ने अपना जीवन भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, सनातन परंपराओं के उत्थान और देश को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया।

राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतीश महाना ने कहा कि अशोक सिंघल ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों को केवल विचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारा। उनके मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को आगे बढ़ाने और पूज्य संतों को एक मंच पर लाने में सिंघल की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

महाना ने कहा कि आज राम मंदिर का जो भव्य और दिव्य स्वरूप दिखाई दे रहा है, उसकी नींव में अशोक सिंघल का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। उनके संबोधन का केंद्र सिंघल का समर्पण, सांस्कृतिक चेतना और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका रही।

संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अशोक सिंघल ने सामाजिक समरसता, सनातन के उत्थान और राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने के उद्देश्य से अपना पूरा जीवन लगा दिया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन केवल किसी व्यक्तित्व को याद करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से देश की एकता, अखंडता, संस्कृति और संस्कारों का संदेश भी समाज तक पहुंचता है।

जन्मशताब्दी वर्ष का आयोजन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें अशोक सिंघल के सार्वजनिक जीवन, विचारों और योगदान को नई पीढ़ी के सामने रखने का अवसर मिलता है। हालांकि, किसी भी व्यक्तित्व की विरासत को समझने के लिए उसके विचारों के साथ-साथ उसके कार्यों और सामाजिक प्रभाव का तथ्यपरक आकलन भी जरूरी है।

मीडिया की जिम्मेदारी पर क्या बोले सतीश महाना?

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में भ्रम फैलाने से जुड़े सवाल पर सतीश महाना ने पत्रकारिता की जिम्मेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है और उसकी भूमिका केवल सुनी-सुनाई बातों को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

महाना के शब्दों में, चौथे स्तंभ की जिम्मेदारी वास्तविकता को भी सामने लाने की है। उनका यह बयान समाचारों में तथ्य, संदर्भ और सत्यापन के महत्व की ओर ध्यान खींचता है। किसी भी विषय पर रिपोर्टिंग करते समय दावों की पुष्टि, संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल करना पत्रकारिता की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।

आयोजन का संदेश और सार्वजनिक विमर्श

बिजनौर में आयोजित समारोह में सतीश महाना ने अशोक सिंघल के योगदान को भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राम जन्मभूमि आंदोलन से जोड़कर प्रस्तुत किया। उनके संबोधन में एक ओर सिंघल के प्रति सम्मान और उनके योगदान का उल्लेख था, तो दूसरी ओर मीडिया की तथ्यपरक भूमिका पर जोर दिया गया।

ऐसे आयोजनों की सार्थकता इस बात से भी तय होती है कि उनमें व्यक्त विचार समाज तक किस रूप में पहुंचते हैं और संस्कृति, सामाजिक सद्भाव तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़े मुद्दों पर कितना सार्थक संवाद आगे बढ़ता है।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें