अब दवा की दुकान की जानकारी छिपी नहीं रहेगी! 1 नवंबर से फार्मेसी की वेबसाइट पर दिखेगा लाइसेंस, फार्मासिस्ट और दवाओं का स्टॉक
अस्पताल की फार्मेसी में दवा कितने में खरीदी और कितने में बेची जा रही है, इसकी भी लगानी होगी जानकारी; 11 अक्टूबर से नए थोक दवा लाइसेंस पर लगी रोक हटेगी
अवनीश त्यागी। Target TV Live | विशेष रिपोर्ट
लखनऊ/बिजनौर। दवा खरीदने वाले लोगों के लिए उत्तर प्रदेश से एक अहम खबर है। अब दवा की दुकान या फार्मेसी के बारे में जरूरी जानकारी जानने के लिए सिर्फ दुकान के काउंटर पर पूछताछ करने की जरूरत नहीं होगी। 1 नवंबर 2026 से रिटेल फार्मेसियों को अपनी पब्लिक वेबसाइट बनाकर कई जरूरी जानकारियां लोगों के सामने रखनी होंगी।
इस वेबसाइट पर फार्मेसी का लाइसेंस नंबर, वहां काम करने वाले फार्मासिस्ट की जानकारी, लाइसेंसी परिसर और दवाओं के स्टॉक का विवरण देना होगा। खास बात यह है कि स्टॉक समेत जरूरी जानकारी को हर सप्ताह अपडेट करना होगा।
यह निर्देश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने 6 अक्टूबर को जारी किए हैं। सभी औषधि निरीक्षकों और सहायक आयुक्त (औषधि) को अपने-अपने क्षेत्र में इसका पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
यानी अब फार्मेसी की पहचान ऑनलाइन भी होगी
सीधी भाषा में समझें तो सरकार चाहती है कि किसी रिटेल फार्मेसी के बारे में जरूरी जानकारी सिर्फ दुकान तक सीमित न रहे। उसकी लाइसेंस संख्या से लेकर वहां नियुक्त फार्मासिस्ट और स्टॉक की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध रहे।
आदेश में साफ कहा गया है कि यह जानकारी साप्ताहिक रूप से अपडेट करनी होगी।
इसका मतलब यह हुआ कि सिर्फ वेबसाइट बनाकर मामला खत्म नहीं होगा। दवाओं के स्टॉक जैसी बदलने वाली जानकारी को समय-समय पर अपडेट करना होगा।
अस्पताल की फार्मेसी में मरीजों के लिए खास बदलाव
इस आदेश का सबसे अहम हिस्सा अस्पतालों में चलने वाली फार्मेसियों से जुड़ा है।
अस्पताल की फार्मेसी में मरीजों के लिए दवाओं की वास्तविक खरीद दर और बिक्री दर के आधार पर मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी।
यानी मरीज और उसके परिजन यह जान सकेंगे कि जिस दवा की बिक्री की जा रही है, उसकी खरीद और बिक्री से जुड़ी कीमत क्या है।
यह व्यवस्था खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्पताल में इलाज के दौरान दवाएं अक्सर तुरंत खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे समय में मरीज के सामने दवा की कीमत से जुड़ी जानकारी साफ तौर पर मौजूद होना उसके लिए उपयोगी हो सकता है।
दवा का स्टॉक भी रहेगा नजर के सामने
आदेश में रिटेल फार्मेसियों को स्टॉक संबंधी जानकारी भी वेबसाइट पर देने को कहा गया है।
हालांकि आदेश में स्टॉक का विवरण किस तकनीकी प्रारूप में और कितनी गहराई तक दिखाना होगा, इसका विस्तृत प्रारूप इस पत्र में नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल इतना स्पष्ट है कि स्टॉक संबंधी विवरण सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराना और उसे साप्ताहिक रूप से अपडेट करना होगा।
औषधि निरीक्षकों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
सरकार ने आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन इसे जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी अब औषधि विभाग के अधिकारियों की होगी।
क्षेत्र के औषधि निरीक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र की फार्मेसियां निर्धारित व्यवस्था का पालन कर रही हैं।
यानी आने वाले समय में जांच के दौरान यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि फार्मेसी ने वेबसाइट बनाई या नहीं, उस पर जरूरी जानकारी है या नहीं और जानकारी समय पर अपडेट हो रही है या नहीं।
11 अक्टूबर से थोक दवा कारोबारियों को भी राहत
इसी आदेश में थोक दवा कारोबार से जुड़ा एक दूसरा बड़ा फैसला भी लिया गया है।
23 जुलाई 2026 को नए थोक विक्रय लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाई गई थी। अब आगामी नवरात्रि को देखते हुए व्यापारियों के हित में 11 अक्टूबर 2026 से यह रोक हटाने का फैसला किया गया है।
इसका मतलब है कि 11 अक्टूबर के बाद नए थोक दवा लाइसेंस के लिए नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
एक तरफ पारदर्शिता, दूसरी तरफ कारोबार के लिए रास्ता साफ
6 अक्टूबर के इस आदेश में दवा कारोबार से जुड़े दो अलग-अलग पहलू साफ नजर आते हैं।
एक तरफ सरकार रिटेल फार्मेसियों और अस्पताल की फार्मेसियों में जानकारी को ज्यादा पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ थोक दवा कारोबारियों के लिए नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का रास्ता खोला गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह व्यवस्था कागज से निकलकर जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।
1 नवंबर से शुरू होगी असली परीक्षा
आदेश में 1 नवंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि प्रदेश की रिटेल फार्मेसियां वेबसाइट और साप्ताहिक अपडेट की व्यवस्था को किस तरह अपनाती हैं।
अस्पताल की फार्मेसियों में भी खरीद और बिक्री दर की मूल्य सूची कितनी नियमित और वास्तविक जानकारी के साथ प्रदर्शित की जाती है, यह व्यवस्था की सफलता का अहम पैमाना होगा।
फिलहाल इतना साफ है कि दवा कारोबार से जुड़ी जानकारी को ज्यादा खुला और लोगों तक आसानी से पहुंचाने की दिशा में FSDA ने एक नया कदम उठाया है। अब निगाह इसके जमीनी अमल पर रहेगी।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
Target TV Live | विशेष रिपोर्ट












