बदायूँ में डेंगू-अज्ञात बुखार का तांडव: इलाज के अभाव में 10 साल के मासूम ने तड़पकर तोड़ा दम; सिस्टम लाचार, मां-दादी का रो-रोकर बुरा हाल

बदायूँ (बिसौली) | रिपोर्ट: दिनेश कुमार (TargetTvLive)
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले की बिसौली तहसील क्षेत्र से स्वास्थ्य तंत्र की घोर लापरवाही और लाचारी की एक कलेजा कांप उठने वाली ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। ग्राम जगतपीपरी में डेंगू और अज्ञात बुखार का प्रकोप इतना बेकाबू हो चुका है कि यह मासूम जिंदगियों को निगलने लगा है। सरकारी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच आज गांव के एक अत्यंत निर्धन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जहां 10 वर्षीय मासूम ने सही समय पर इलाज न मिलने के कारण तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
ताज़ा अपडेट्स एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- दर्दनाक हादसा: बिसौली तहसील के जगतपीपरी गांव में रायसिंह के 10 वर्षीय मासूम पुत्र की इलाज के अभाव में मौत।
- बेबसी और गरीबी की मार: घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं; दाने-दाने को मोहताज निर्धन मां और वृद्ध दादी इलाज कराने में रहीं असमर्थ।
- गांव में महामारी जैसी दहशत: पूरे गांव में फैला बुखार व डेंगू का प्रकोप, चारों तरफ सन्नाटा और मातम का माहौल।
- प्रशासन से मांग: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही की निष्पक्ष जांच, मेडिकल कैंप और फॉगिंग की गुहार।
घर का इकलौता सहारा छीना: मां और वृद्ध दादी का करुण क्रंदन
मासूम की अचानक हुई मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है। बच्चे के पिता आजीविका के सिलसिले में गांव से बाहर रहते हैं, जिसके चलते घर की पूरी देखभाल और जिम्मेदारी मां और वृद्ध दादी के कंधों पर ही थी। परिवार आर्थिक रूप से बेहद तंगहाली से गुजर रहा है।
तंगहाली और घर में किसी पुरुष सदस्य के न होने की मजबूरी में बेबस मां और दादी अपने कलेजे के टुकड़े को समय पर सही डॉक्टरी इलाज नहीं दिला सकीं। जैसे ही बच्चे की सांसें थमीं, मां और दादी की चीत्कार से पूरा गांव सिहर उठा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीणों की आंखें भी इस मंजर को देखकर नम हो गईं।
स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है।
ग्रामीणों की दो टूक मांग: “यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में समय रहते चिकित्सा कैंप लगाया होता और एंटी-लार्वा छिड़काव या फॉगिंग कराई होती, तो आज इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।”
क्षेत्रवासियों और समाजसेवियों ने प्रदेश शासन व स्थानीय प्रशासन से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
- तत्काल आर्थिक सहायता: आर्थिक रूप से अत्यंत बेबस और शोकाकुल परिवार को तुरंत राहत राशि प्रदान की जाए।
- उच्चस्तरीय जांच: बच्चे की मौत और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- आपातकालीन चिकित्सा शिविर: गांव में डॉक्टरों की टीम भेजकर घर-घर जांच शिविर लगाया जाए।
- व्यापक फॉगिंग व सैनिटाइजेशन: मच्छरों के प्रकोप को खत्म करने के लिए गांव-गांव में सैनिटाइजेशन, कीटनाशक छिड़काव और फॉगिंग की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त की जाए।
TargetTvLive पर ग्राउंड जीरो से दिनेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।












