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बिजनौर में CMO के आदेश पर बड़ा विवाद! मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने किया खारिज, DM और आयुक्त तक पहुंचा मामला

CMO के आदेश पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य का बड़ा प्रशासनिक एक्शन: अटैचमेंट आदेश को किया खारिज, आयुक्त और DM तक पहुंचा मामला

बिना प्राचार्य की अनुमति कर्मचारियों की संबद्धता नहीं होगी, प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर मेडिकल कॉलेज का स्पष्ट संदेश; CMO कार्यालय के आदेश पर उठे गंभीर सवाल
By: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

हाइटलाइट्स

  • वरिष्ठ सहायक की पूर्व संबद्धता समाप्त होने के बावजूद जारी हुआ नया अटैचमेंट आदेश।
  • मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने आदेश को अभिलेखों के अनुरूप न बताते हुए निरस्त करने का अनुरोध किया।
  • भविष्य में बिना प्राचार्य की पूर्व अनुमति कोई अटैचमेंट या कार्य आवंटन नहीं।
  • संबंधित कर्मचारी से मूल कार्यालय में कार्य लेने का अनुरोध।
  • आयुक्त, जिलाधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई।
  • प्रशासनिक समन्वय और अधिकार क्षेत्र को लेकर मेडिकल कॉलेज का स्पष्ट रुख।

बिजनौर। महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बिजनौर में प्रशासनिक अधिकारों और कार्य विभाजन को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय द्वारा जारी वरिष्ठ सहायक के अटैचमेंट (संबद्धता) आदेश पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे प्रशासनिक अभिलेखों एवं पूर्व आदेशों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने का अनुरोध किया है। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रकरण की जानकारी मुरादाबाद मंडल के आयुक्त, जिलाधिकारी बिजनौर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिससे मामला अब केवल विभागीय पत्राचार तक सीमित नहीं रह गया है।

इस घटनाक्रम को स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच प्रशासनिक समन्वय तथा अधिकार क्षेत्र की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह आदेश भविष्य में कर्मचारियों की अटैचमेंट प्रक्रिया के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्था का आधार भी बन सकता है।

क्या है पूरा मामला?

30 जुलाई 2026 को जारी पत्र में प्राचार्य ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर को अवगत कराया कि वरिष्ठ सहायक श्री ललित कुमार की चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्धता पूर्व में ही समाप्त कर दी गई थी और उन्हें विधिवत कार्यमुक्त भी कर दिया गया था।

इसके बावजूद 25 जुलाई 2026 को उन्हें दो दिनों के लिए पुनः अटैच किए जाने का आदेश जारी किया गया। प्राचार्य ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह आदेश पूर्व में जारी प्रशासनिक आदेशों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण उक्त आदेश को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए संबंधित कर्मचारी से उनके मूल कार्यालय में ही कार्य लेने की बात कही गई है।

प्राचार्य का स्पष्ट संदेश—’बिना अनुमति नहीं होगा कोई अटैचमेंट’

इस पूरे पत्र का सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला बिंदु यह है कि प्राचार्य ने भविष्य के लिए स्पष्ट प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में चिकित्सा महाविद्यालय से संबंधित किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संबद्धता (अटैचमेंट), कार्य आवंटन अथवा अस्थायी तैनाती की आवश्यकता हो, तो उससे पूर्व चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

प्राचार्य ने इस निर्देश के पीछे प्रशासनिक समन्वय बनाए रखने, अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता सुनिश्चित करने और कार्य संचालन में अनावश्यक व्यवधान रोकने की आवश्यकता बताई है।

आयुक्त और जिलाधिकारी को भी भेजी गई आदेश की प्रति

इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राचार्य ने अपने पत्र की प्रतिलिपि केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ही नहीं भेजी, बल्कि आयुक्त, मुरादाबाद मंडल, जिलाधिकारी बिजनौर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की।

इससे यह संकेत मिलता है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस विषय को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए उच्च स्तर पर भी संज्ञान के लिए भेजा है।

प्रशासनिक विश्लेषण: क्यों अहम है यह आदेश?

सरकारी विभागों में कर्मचारियों की संबद्धता (Attachment) केवल कार्य सुविधा का विषय नहीं होती, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकार, नियंत्रण और जवाबदेही से भी जुड़ा मुद्दा होता है।

यदि किसी कर्मचारी की संबद्धता पहले ही समाप्त हो चुकी हो और उसे कार्यमुक्त कर दिया गया हो, तो उसके संबंध में पुनः आदेश जारी होने से प्रशासनिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में प्राचार्य द्वारा भविष्य के लिए पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाए जाने का निर्देश प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

हालांकि, पत्र में किसी प्रकार के व्यक्तिगत विवाद या आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है। उपलब्ध दस्तावेज़ मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया और समन्वय सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

TargetTvLive विश्लेषण

यह मामला केवल एक कर्मचारी के दो दिवसीय अटैचमेंट तक सीमित नहीं दिखाई देता। प्राचार्य के पत्र से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरता है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपने प्रशासनिक अधिकारों और कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय करना चाहता है। भविष्य में इस आदेश का प्रभाव चिकित्सा महाविद्यालय और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

बिजनौर मेडिकल कॉलेज में बड़ा प्रशासनिक फैसला: CMO का अटैचमेंट आदेश खारिज, बिना प्राचार्य अनुमति अब नहीं होगा कोई संबद्धीकरण

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