बिजनौर में बढ़ रहा ‘जल संकट’ का खतरा! 70% खेती और 80% पेयजल भूजल पर निर्भर, अब 16 जुलाई से शुरू होगा बड़ा अभियान

डीएम जसजीत कौर का बड़ा फैसला—हर गांव और शहर में चलेगा ‘भूजल सप्ताह’, जल बचाने के लिए प्रशासन उतरेगा मैदान में
अवनीश त्यागी | TargetTvLive | बिजनौर
बिजनौर: अगर आज पानी नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में न खेतों के लिए पर्याप्त पानी होगा और न ही घरों तक आसानी से पेयजल पहुंचेगा। यही वजह है कि बिजनौर में अब जल संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। जिला प्रशासन 16 से 22 जुलाई तक पूरे जिले में ‘भूजल सप्ताह’ मनाएगा, ताकि लोगों को पानी की हर बूंद की कीमत समझाई जा सके।
सोमवार को जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में इस अभियान की विस्तृत योजना तैयार की गई। इस बार अभियान की थीम रखी गई है—“जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प।”
आंकड़े बता रहे हैं खतरे की घंटी
बैठक में सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 70 प्रतिशत सिंचाई, 80 प्रतिशत पेयजल और 85 प्रतिशत उद्योगों की जल जरूरत भूजल से पूरी होती है। लगातार बढ़ते दोहन और वर्षा जल का पर्याप्त संरक्षण न होने के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता शहरों की है, जहां पानी की मांग लगातार बढ़ रही है।
बिजनौर के किसानों के लिए क्यों अहम है यह अभियान?
बिजनौर गन्ना और धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों का बड़ा जिला है। यहां लाखों किसान ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भर हैं। यदि भूजल इसी तरह घटता रहा तो खेती की लागत बढ़ेगी, सिंचाई मुश्किल होगी और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। यही कारण है कि प्रशासन अब पानी बचाने वाली खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है।
हर गांव-शहर में होंगे बड़े कार्यक्रम
भूजल सप्ताह के दौरान पूरे जिले में जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में प्रतियोगिताएं होंगी, जागरूकता रैलियां निकलेंगी, लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी, तालाबों और जल स्रोतों की सफाई होगी, पौधरोपण कराया जाएगा और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर, मल्चिंग और धान की सीधी बुवाई जैसी कम पानी खर्च करने वाली तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी।
डीएम का साफ संदेश—’हर बूंद बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा’
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों से कहा कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर न रह जाए। हर विभाग मिलकर काम करे और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए, ताकि जल संरक्षण वास्तव में जनआंदोलन बन सके।
TargetTvLive Analysis
बिजनौर में हर साल बारिश तो होती है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा बिना संरक्षित हुए बह जाता है। दूसरी ओर ट्यूबवेलों से लगातार बढ़ता जल दोहन भूजल स्तर को नीचे धकेल रहा है। यदि अब भी वर्षा जल संचयन, तालाबों का संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को गंभीरता से नहीं अपनाया गया तो आने वाले वर्षों में पानी का संकट और गहरा सकता है। ऐसे में ‘भूजल सप्ताह’ सिर्फ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जिले के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम पहल है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन के साथ आम लोग भी पानी बचाने की जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाते हैं।
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