गन्ने के साथ अब ‘श्री अन्न’ की खेती करेंगे किसान? बिजनौर में डीएम का बड़ा प्लान, बदल सकती है खेती की तस्वीर
अवनीश त्यागी | TargetTvLive | बिजनौर
बिजनौर, जिसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गन्ना बेल्ट माना जाता है, अब खेती के एक नए दौर में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है। दशकों से गन्ना यहां के किसानों की पहचान और आय का सबसे बड़ा आधार रहा है, लेकिन अब प्रशासन चाहता है कि किसान गन्ने के साथ मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती भी अपनाएं, ताकि कम लागत में अधिक मुनाफा और खेती में स्थिर आय सुनिश्चित हो सके।
इसी सोच के साथ जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में हुई आत्मा (ATMA) गवर्निंग बोर्ड की बैठक में वर्ष 2026-27 की जनपदीय कृषि कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। बैठक में साफ संदेश दिया गया कि भविष्य की खेती केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और मिट्टी की सेहत पर जोर दिया जाएगा।
आखिर गन्ने के साथ मिलेट्स क्यों?
गन्ना आज भी बिजनौर की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल है, लेकिन बढ़ती लागत, पानी की अधिक जरूरत और एक ही फसल पर निर्भरता किसानों के लिए चुनौती बन रही है।
इसीलिए प्रशासन ने सुझाव दिया है कि किसान गन्ने की ट्रेंच विधि के साथ ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, कुट्टू और रामदाना जैसी श्री अन्न फसलें उगाएं। इससे एक ही खेत से अतिरिक्त आय मिलने की संभावना बढ़ेगी और जोखिम भी कम होगा।
60% कम हुआ रासायनिक उर्वरकों का उपयोग
बैठक में जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में खरीफ सीजन में जिले में रासायनिक उर्वरकों की खपत लगभग 60 प्रतिशत कम हुई है। यह संकेत है कि किसान प्राकृतिक और संतुलित खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिट्टी की उर्वरता बेहतर होगी, उत्पादन लागत घटेगी और लंबे समय में खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।
किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और नई तकनीक का अनुभव
आत्मा योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 495 प्रदर्शन प्लॉट, 55 फार्म स्कूल और 1,848 किसानों के प्रशिक्षण एवं अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाएंगे। किसानों को देश और प्रदेश के सफल कृषि मॉडलों का भ्रमण भी कराया जाएगा ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
मिट्टी बचाने और आय बढ़ाने का दोहरा लक्ष्य
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों को मृदा में जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी कृषि रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
क्या बदलेगी बिजनौर की खेती?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गन्ने के साथ सहफसली खेती, प्राकृतिक खेती और श्री अन्न के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया गया, तो बिजनौर के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं।
फिलहाल इतना तय है कि गन्ना प्रधान बिजनौर अब खेती के नए मॉडल की ओर कदम बढ़ा चुका है, जहां लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और विविध बनाना है।
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