66 लाख पौधे… लेकिन क्या बच पाएंगे? बिजनौर में रिकॉर्ड वृक्षारोपण के बाद उठे सबसे बड़े सवाल

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में बना नया इतिहास, अब असली चुनौती पौधों को पेड़ बनाने की
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रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाअभियान के तहत रविवार को बिजनौर ने हरियाली का नया अध्याय लिखने का दावा किया। प्रशासन के अनुसार जनपद में एक ही दिन में 66 लाख से अधिक पौधे लगाए गए, जो जिले के इतिहास के सबसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में से एक माना जा रहा है।
मुख्य कार्यक्रम महात्मा विदुर स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुआ, जहां प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की। उनके साथ जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भी पौधे लगाए।
लेकिन इस पूरे अभियान के बीच एक सवाल हर जिम्मेदार नागरिक के मन में है—
क्या ये 66 लाख पौधे आने वाले वर्षों में पेड़ बनेंगे, या फिर यह रिकॉर्ड सिर्फ सरकारी आंकड़ों तक ही सीमित रह जाएगा?
रिकॉर्ड तो बन गया… अब परीक्षा संरक्षण की
वृक्षारोपण करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन पौधे को जीवित रखना सबसे कठिन काम है।
हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन समय के साथ बड़ी संख्या में पौधे पानी, सुरक्षा और देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं। इसलिए इस अभियान की वास्तविक सफलता अगले कुछ महीनों और वर्षों में तय होगी।
बोले मंत्री?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। आज बढ़ते तापमान, घटते जंगल और बदलते मौसम को देखते हुए हर नागरिक को पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जो देश के सबसे बड़े पर्यावरण अभियानों में शामिल है।
डीएम जसजीत कौर की अपील
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कहा कि जनभागीदारी से ही बिजनौर को अधिक हराभरा बनाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी करें, क्योंकि पौधा तभी सफल होगा जब वह पेड़ बनेगा।
बिजनौर में बनेंगे अलग-अलग थीम वाले वन
अभियान के नोडल अधिकारी एवं आयुक्त निबंधन एवं सहकारिता योगेश कुमार ने बताया कि जिले में केवल पौधे लगाने तक अभियान सीमित नहीं रहेगा।
इसके तहत छाया वन, समृद्धि वन, समरसता वन, कपि वन, ऊर्जावन और अविरल वन जैसी विशेष थीम पर हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता दोनों को लाभ मिलेगा।
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अब इन सवालों का जवाब भी जरूरी है…
रिकॉर्ड पौधारोपण के साथ अब जनता जानना चाहती है—
- क्या सभी पौधों की जियो-टैगिंग होगी?
- कितने पौधों की नियमित सिंचाई होगी?
- उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी?
- छह महीने और एक साल बाद कितने पौधे जीवित मिलेंगे?
- क्या सर्वाइवल रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएगी?
यदि इन सवालों पर पारदर्शिता दिखाई जाती है, तभी यह अभियान केवल रिकॉर्ड नहीं बल्कि स्थायी पर्यावरणीय बदलाव का उदाहरण बन सकेगा।
29 नर्सरियों से मुफ्त मिले पौधे
वन विभाग के अनुसार जिले की 29 सरकारी नर्सरियों से आम लोगों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए गए। विभाग का कहना है कि वर्ष 2017 से अब तक बिजनौर में लगभग 6 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है।
कार्यक्रम में रही उत्साहपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और छात्राओं को पौधे वितरित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष इंदिरा सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, डीसी जी राम आर.बी. यादव, प्रभागीय निदेशक वानिकी जय सिंह कुशवाहा सहित अनेक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
TargetTvLive निष्कर्ष
66 लाख पौधे लगाना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब ये पौधे आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर बिजनौर को हराभरा करें।
रिकॉर्ड बनाना आसान है, लेकिन रिकॉर्ड को हरियाली में बदलना ही इस अभियान की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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