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LLB परीक्षा में बड़ा खुलासा! 61 छात्रों ने मांगा दोबारा मूल्यांकन, कॉपियों की जांच में सामने आईं कई खामियां

LLB परीक्षा में बड़ा खुलासा! 61 छात्रों ने मांगा दोबारा मूल्यांकन, कॉपियों की जांच में सामने आईं कई खामियां

राज्यपाल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण; अमूल्यांकित उत्तर, अंक जोड़ने की त्रुटियां और आंतरिक मूल्यांकन पर उठे सवाल

गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय मुरादाबाद में एलएलबी उत्तर-पुस्तिकाओं के निरीक्षण के दौरान मूल्यांकन संबंधी त्रुटियां सामने आईं। 61 छात्रों ने चैलेंज पुनर्मूल्यांकन का आवेदन किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

TargetTvLive Exclusive | विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

मुरादाबाद। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में एलएलबी (प्रथम सेमेस्टर) की उत्तर-पुस्तिकाओं के निःशुल्क निरीक्षण के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। राज्यपाल की ओर से नामित प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुए निरीक्षण में कई उत्तर-पुस्तिकाओं में मूल्यांकन संबंधी त्रुटियां मिलीं, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपने अंकों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए चैलेंज पुनर्मूल्यांकन का विकल्प चुना।

विश्वविद्यालय के अनुसार, छह महाविद्यालयों के 176 विद्यार्थियों ने निरीक्षण के लिए पंजीकरण कराया था। इनमें से 93 विद्यार्थी उपस्थित हुए। निरीक्षण के बाद 26 विद्यार्थी अपने मूल्यांकन से संतुष्ट रहे, जबकि 61 विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत करता है कि विद्यार्थियों का एक बड़ा वर्ग अपने मूल्यांकन को लेकर पुनः जांच चाहता है।

निरीक्षण में क्या-क्या सामने आया?

निरीक्षण के दौरान कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं में अंक जोड़ने में त्रुटियां, कुछ उत्तरों का मूल्यांकन न होना तथा अन्य तकनीकी कमियां सामने आईं। एक उत्तर-पुस्तिका में दो रिक्त पृष्ठों के बाद लिखे गए उत्तरों का मूल्यांकन नहीं किया गया था। मामला सामने आने पर कुलपति ने तत्काल पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए।

विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि कुछ विद्यार्थियों ने उत्तर-पुस्तिकाओं में अनुक्रमांक और पहचान संबंधी संकेत कई स्थानों पर लिखे थे। सामान्य परिस्थितियों में इसे अनुचित साधन की श्रेणी में माना जा सकता है, लेकिन इस बार विद्यार्थियों के हित में ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

आंतरिक मूल्यांकन पर भी उठे सवाल

निरीक्षण के बाद स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में आंतरिक मूल्यांकन को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। विश्वविद्यालय ने बताया कि कुछ महाविद्यालयों में अधिकांश विद्यार्थियों को 30 में से 24 अंक दिए गए, जबकि कुछ संस्थानों में लगभग सभी छात्रों को समान आंतरिक अंक दिए जाने की प्रवृत्ति सामने आई। विश्वविद्यालय ने इसे उचित नहीं माना और संकेत दिया कि ऐसी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।

इसके अलावा कुछ महाविद्यालयों द्वारा अनुमोदित शिक्षकों के नाम उपलब्ध न कराना, मूल्यांकन कार्य में शिक्षकों की अनुपस्थिति तथा प्रशासनिक स्तर की अन्य कमियों का भी उल्लेख किया गया।

TargetTvLive Analysis: केवल कॉपियों की जांच नहीं, व्यवस्था की भी परीक्षा

उत्तर-पुस्तिकाओं का निरीक्षण केवल विद्यार्थियों को अपनी कॉपी दिखाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी परीक्षण है। यदि निरीक्षण के दौरान अमूल्यांकित उत्तर और अंक जोड़ने जैसी त्रुटियां सामने आती हैं, तो यह संकेत है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

साथ ही, बड़ी संख्या में विद्यार्थियों द्वारा पुनर्मूल्यांकन का विकल्प चुनना यह दर्शाता है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने के लिए नियमित निगरानी और जवाबदेही महत्वपूर्ण है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • 6 महाविद्यालय हुए शामिल
  • 176 विद्यार्थियों ने कराया पंजीकरण
  • 93 विद्यार्थी निरीक्षण में पहुंचे
  • 26 विद्यार्थी मूल्यांकन से संतुष्ट
  • 61 विद्यार्थियों ने चैलेंज पुनर्मूल्यांकन का आवेदन किया
  • निरीक्षण में अंक जोड़ने और मूल्यांकन संबंधी त्रुटियां सामने आईं

TargetTvLive के सवाल

  • क्या सभी उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन गुणवत्ता जांच के बाद ही अंतिम घोषित होना चाहिए?
  • क्या डिजिटल मूल्यांकन और स्वचालित सत्यापन प्रणाली लागू करने का समय आ गया है?
  • आंतरिक मूल्यांकन में समान अंक देने की प्रवृत्ति पर क्या प्रभावी निगरानी होगी?
  • क्या भविष्य में प्रत्येक परीक्षा के बाद उत्तर-पुस्तिका निरीक्षण को नियमित व्यवस्था बनाया जाएगा?

निष्कर्ष

विश्वविद्यालय ने पुनर्मूल्यांकन स्वतंत्र शिक्षकों से कराने और प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने का आश्वासन दिया है। अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की निगाह इस बात पर रहेगी कि पुनर्मूल्यांकन कितनी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरा होता है। यह मामला केवल अंकों का नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों के विश्वास का भी है।

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