HSRP बुकिंग के नाम पर देशभर में बिछाया साइबर ठगी का जाल! बिजनौर पुलिस ने 11 शातिर दबोचे, AI और फर्जी वेबसाइट से लोगों को बना रहे थे शिकार
बिजनौर | अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। अगर आप भी अपनी गाड़ी की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) ऑनलाइन बुक कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। बिजनौर पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी HSRP वेबसाइट बनाकर और निवेश के नाम पर लोगों को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। इस कार्रवाई में 11 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और नकदी समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत भी बरामद किए हैं।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन Cy-Vajra’ अभियान के तहत थाना स्योहारा पुलिस ने की।
ऐसे फंसते थे लोग
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले सोशल मीडिया और इंटरनेट पर HSRP बुकिंग और निवेश से जुड़े विज्ञापन चलाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता, वह असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता। वहां ऑनलाइन भुगतान करते ही पैसा सीधे गिरोह के खातों में पहुंच जाता।
गिरोह सिर्फ HSRP तक सीमित नहीं था। आरोपी निवेश पर अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
AI और ChatGPT का गलत इस्तेमाल
पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट तैयार करने और उसकी तकनीकी सामग्री विकसित करने में ChatGPT सहित अन्य AI टूल्स का इस्तेमाल किया। पुलिस का कहना है कि नई तकनीकों का उपयोग अपराध के लिए किया गया, जिससे साइबर ठगी का तरीका और अधिक पेशेवर दिखाई देता था।
फर्जी जनसेवा केंद्रों से खुलवाए जाते थे बैंक खाते
गिरोह के कुछ सदस्य फर्जी जनसेवा केंद्र (CSC) चलाते थे। यहां लोगों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती और अलग-अलग माध्यमों से निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांट दी जाती थी।
बरामद हुआ पूरा साइबर सेटअप
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान चार लैपटॉप, दो प्रिंटर, एक टैबलेट, 15 स्मार्टफोन, फिंगरप्रिंट मशीन, 61 आधार कार्ड, 42 बैंक पासबुक, 33 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 वोटर आईडी कार्ड, 19 पैन कार्ड, नकद 1.20 लाख रुपये तथा 88 हजार रुपये की बैंक राशि फ्रीज की है। कुल बरामदगी 2.08 लाख रुपये आंकी गई है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बड़ा संदेश भी
यह मामला साफ करता है कि साइबर अपराधी अब केवल फर्जी कॉल या मैसेज तक सीमित नहीं हैं। वे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए ऑनलाइन भुगतान करते समय वेबसाइट का पता (URL) और उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। लेकिन इस पूरे मामले ने यह भी साबित कर दिया कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए हथकंडे अपना रहे हैं। इसलिए केवल पुलिस ही नहीं, आम लोगों को भी डिजिटल दुनिया में हर कदम बेहद सतर्क होकर रखना होगा।
अगर कोई वेबसाइट, निवेश योजना या ऑनलाइन भुगतान का लिंक थोड़ा भी संदिग्ध लगे, तो तुरंत उसकी जांच करें। छोटी-सी लापरवाही आपकी जीवनभर की जमा-पूंजी पर भारी पड़ सकती है।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
TargetTvLive | डिजिटल डेस्क
#TargetTvLive #AvnishTyagi #Bijnor #CyberCrime #CyVajra #HSRP #FakeWebsite #CyberFraud #InvestmentFraud #BijnorPolice #AI #ChatGPT #BreakingNews #HindiNews #GoogleDiscover #SEO #UttarPradesh #DigitalSafety












