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नोटिस… सीलिंग… फिर वही संचालन! बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

बिजनौर में झोलाछापों पर कार्रवाई या सिर्फ औपचारिकता? नोटिस, सीलिंग और फिर संचालन पर उठे सवाल, स्वास्थ्य विभाग से जवाब की मांग

By: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद में कथित झोलाछाप चिकित्सकों, अवैध क्लीनिकों, नर्सिंग होम और अस्पतालों के खिलाफ समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई चर्चा का विषय बनती रही है। नोटिस जारी होने, संस्थानों को सील किए जाने और बाद में कुछ मामलों में उनके दोबारा संचालित होने की चर्चाओं के बीच अब आम लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इन कार्रवाइयों का अंतिम परिणाम क्या रहा और नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया गया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी क्लीनिक, अस्पताल या नर्सिंग होम में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं और उसे सील किया जाता है, तो बाद में उसके दोबारा संचालन की अनुमति किन कानूनी प्रक्रियाओं और मानकों के आधार पर दी जाती है? क्या सभी कमियां पूरी तरह दूर होने के बाद ही संचालन की अनुमति दी जाती है? यदि ऐसा है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

इसी तरह कथित झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ चलने वाले अभियानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास चिकित्सा कार्य करने की वैधानिक पात्रता नहीं है, तो उसके विरुद्ध की गई कार्रवाई का अंतिम परिणाम भी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।

जनचर्चाओं के बीच एक और सवाल सामने आ रहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर बनाए गए नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारियां क्या हैं? क्या उनकी नियमित समीक्षा होती है? कितने निरीक्षण किए गए, कितनी अनियमितताएं मिलीं और कितने मामलों में अंतिम कार्रवाई हुई? इन सभी बिंदुओं पर पारदर्शिता की मांग की जा रही है।

इस विषय पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र से विभिन्न अवसरों पर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। यदि किसी स्तर पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो पाती या सवालों का उत्तर नहीं मिलता, तो स्वाभाविक रूप से जनमानस में जिज्ञासा और प्रश्न पैदा होते हैं। हालांकि, किसी भी अधिकारी के मौन या प्रतिक्रिया न देने से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जनहित में आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। यदि किसी अस्पताल, क्लीनिक या नर्सिंग होम के विरुद्ध कार्रवाई होती है, तो उसके कारण, सुधारात्मक कदम और पुनः संचालन की अनुमति से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने से भ्रम की स्थिति समाप्त हो सकती है।

जनता के प्रमुख सवाल

  • कथित झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ दर्ज मामलों का अंतिम परिणाम क्या है?
  • सील किए गए अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम किन शर्तों पर दोबारा संचालित हुए?
  • ब्लॉक स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है?
  • निरीक्षण और कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
  • क्या स्वास्थ्य विभाग जिले में नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित कर रहा है?

पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा

स्वास्थ्य व्यवस्था सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी है। इसलिए प्रत्येक कार्रवाई केवल कागजी न रहकर उसके परिणाम भी जनता के सामने आने चाहिए। यदि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार हुई हैं, तो विभाग को विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि कहीं सुधार की आवश्यकता है, तो समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई जनता का विश्वास मजबूत करेगी।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं। लोगों की अपेक्षा है कि कथित झोलाछाप चिकित्सकों, अवैध क्लीनिकों, अस्पतालों और नर्सिंग होम से जुड़े सभी मामलों पर स्पष्ट, तथ्यात्मक और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि उठ रहे सवालों का तथ्यपरक उत्तर मिल सके।

(यदि मुख्य चिकित्सा अधिकारी या स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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