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“घर की रसोई बनी कमाई का अड्डा: बिजनौर की महिलाएं अब दे रहीं रोजगार!”

“बिजनौर में ‘विदुर ब्रांड’ की क्रांति: चूल्हे से कारोबार तक—महिलाएं बन रहीं आर्थिक बदलाव की धुरी”

फास्ट फूड ट्रेनिंग से आत्मनिर्भरता की नई राह, SHG मॉडल बना गेमचेंजर
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर, 29 अप्रैल 2026।
जनपद बिजनौर में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत पहल सामने आई है, जहां “विदुर ब्रांड” के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। RSETI, हल्दौर में उपायुक्त स्वरोजगार द्वारा फास्ट फूड एवं मल्टीग्रेन उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण बैच का शुभारंभ किया गया, जो अब एक बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव की बुनियाद बनता नजर आ रहा है।

ट्रेनिंग नहीं, आर्थिक बदलाव की रणनीति

इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को केवल खाना बनाना ही नहीं, बल्कि उसे बाजार में बेचने योग्य उत्पाद में बदलने की पूरी प्रक्रिया सिखाई जा रही है।
फास्ट फूड और मल्टीग्रेन उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह प्रशिक्षण उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने का काम कर रहा है।

उपायुक्त स्वरोजगार ने स्पष्ट कहा कि “विदुर ब्रांड बना रहा आत्मनिर्भर महिला, आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश”—और यह अब जमीनी स्तर पर साकार होता दिख रहा है।

 ‘विदुर ब्रांड’ क्यों बन रहा है बदलाव का मॉडल?

“विदुर ब्रांड” दरअसल एक लोकल ब्रांडिंग रणनीति है, जिसमें स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

  • ✔️ स्थानीय स्तर पर उत्पादन
  • ✔️ पोषणयुक्त मल्टीग्रेन उत्पाद
  • ✔️ कम लागत में ज्यादा मुनाफा
  • ✔️ महिलाओं के लिए स्थायी आय का स्रोत

विश्लेषण:
यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ रोजगार नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें “माइक्रो-उद्यमी” बना रहा है।

 किचन से स्टार्टअप तक का सफर

बिजनौर की महिलाएं अब पारंपरिक भूमिका से बाहर निकलकर आर्थिक फैसलों में भागीदारी निभा रही हैं।
रसोईघर अब उनके लिए “कमाई का केंद्र” बनता जा रहा है, जहां वे प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेच रही हैं।

आर्थिक असर: परिवार से गांव तक

इस पहल के प्रभाव अब धीरे-धीरे दिखाई देने लगे हैं—

  • महिलाओं की आय में वृद्धि
  • परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार
  • गांव स्तर पर छोटे-छोटे व्यवसायों का विकास
  • स्थानीय उत्पादों को नई पहचान

मल्टी-स्किल से मजबूत हो रही महिलाएं

फूड ट्रेनिंग के साथ-साथ सिलाई प्रशिक्षण का भी संचालन किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को एक से अधिक आय के स्रोत मिल रहे हैं।
यह “मल्टी-स्किल मॉडल” उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बना रहा है।

चुनौतियां भी सामने

हालांकि पहल सराहनीय है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं—

  • बाजार में ब्रांड पहचान बनाना
  • बड़े ब्रांड्स से प्रतिस्पर्धा
  • डिजिटल मार्केटिंग की कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाए, तो यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

“विदुर प्रेरणा – स्वदेशी ब्रांड” के तहत चल रही यह पहल बिजनौर में महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है।
यह न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

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