बिजनौर में शुरू हुई ‘हरे सोने’ की खेती, 2 एकड़ में लगेंगे 600 चंदन के पौधे

वैज्ञानिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और फलदार पौधों के साथ तैयार हो रहा आधुनिक चंदन उद्यान, कृषि विभाग ने दिया पूरा सहयोग
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में खेती की तस्वीर बदलने वाली एक नई पहल शुरू हुई है। जनपद मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर ग्राम कासमपुर कृपाराम में दो एकड़ से अधिक भूमि पर 600 चंदन के पौधों का रोपण शुरू किया गया। यह सिर्फ पौधरोपण नहीं, बल्कि आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में एक ऐसा प्रयोग है, जो आने वाले वर्षों में जिले के किसानों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
चंदन उद्यान का शुभारंभ उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा और विवेकानंद दिव्य भारती के अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी ने संयुक्त रूप से किया।
बिना तैयारी नहीं लगाया एक भी पौधा
इस उद्यान को विकसित कर रहे किसान सुकृत कवात्रा ने चंदन की खेती शुरू करने से पहले हर जरूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी की। मिट्टी की जांच कराई गई, भूमि का उपचार किया गया, ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई और विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी लेने के बाद ही पौधरोपण शुरू किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंदन की खेती में शुरुआती तैयारी ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।
चंदन के साथ फलों का भी ‘स्मार्ट कॉम्बिनेशन’
इस परियोजना की खास बात यह है कि चंदन के साथ-साथ कई उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधे भी लगाए जा रहे हैं। इनमें बनाना आम, थाई बारहमासी आम, अमरूद, माल्टा, गोल्डन सेब, अनार, संतरा, लाल आंवला, कुंभकट नींबू, सफेद जामुन, मीठा करौंदा और चीकू जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
इस मिश्रित खेती से किसानों को लंबे समय तक अलग-अलग स्रोतों से आय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कृषि विभाग ने दिया हर संभव सहयोग का भरोसा
उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने कहा कि कृषि विभाग इस परियोजना को हर स्तर पर तकनीकी सहयोग देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो जिले के अनेक किसान भी चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली खेती अपनाने के लिए आगे आएंगे।
दो साल तक विशेषज्ञ करेंगे देखभाल
चंदन के पौधों का रोपण उज्जवला प्लांटेशन, बिजनौर के सीईओ की देखरेख में कराया जा रहा है। संस्था अगले दो वर्षों तक पौधों की नियमित निगरानी, रखरखाव और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगी, जिससे पौधों का बेहतर विकास सुनिश्चित हो सके।
‘किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है’
कार्यक्रम में योगेन्द्र पाल सिंह योगी ने कहा कि चंदन की खेती भविष्य की सबसे लाभकारी कृषि प्रणालियों में से एक बन सकती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो यह पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक आय देने का माध्यम बन सकती है।
इस अवसर पर विषय वस्तु विशेषज्ञ आदित्य चौधरी सहित कई किसान और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर में चंदन की खेती की यह शुरुआत केवल एक निजी परियोजना नहीं, बल्कि जिले में हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर की नई सोच का संकेत है। जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई, वैज्ञानिक खेती, मिश्रित बागवानी और विशेषज्ञों की निगरानी इस मॉडल को खास बनाती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में बिजनौर की पहचान केवल गन्ना और धान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘चंदन की खेती’ भी जिले की नई पहचान बन सकती है।
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