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बिजनौर में बड़ा खुलासा! सबसे बड़े कोचिंग सेंटर ही पंजीकरण सूची से गायब, अब किसकी होगी जांच?

Exclusive Investigation | पंजीकृत संस्थानों पर प्रशासन का शिकंजा, लेकिन हजारों छात्रों को पढ़ाने वाले कई चर्चित कोचिंग सेंटर रिकॉर्ड में ही नहीं!

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर | TargetTvLive 

बिजनौर में कोचिंग संस्थानों की जांच को लेकर जिला प्रशासन ने 17 बिंदुओं पर व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पहली नजर में यह छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दिखाई देता है। लेकिन जब इस पूरी प्रक्रिया की तह तक जाने का प्रयास किया गया तो एक ऐसा तथ्य सामने आया, जिसने पूरे अभियान पर सवालिया निशान लगा दिया।

जिले के कई ऐसे बड़े कोचिंग संस्थान, जहां हर वर्ष सबसे अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं, उनका नाम उपलब्ध पंजीकरण सूची में दिखाई नहीं देता।

यहीं से यह सवाल खड़ा होता है कि जब सबसे बड़े संस्थान ही रिकॉर्ड में नहीं हैं तो प्रशासन की जांच आखिर किसकी होगी?

जांच का दायरा क्या है?

जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय तहसील स्तरीय समितियां पंजीकृत कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करेंगी।

जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया गया है—

  • भवन स्वयं का या किराये का
  • वैध किरायानामा
  • बेसमेंट में संचालन
  • भवन की सुरक्षा
  • शिक्षकों की योग्यता
  • छात्रों की संख्या
  • सीसीटीवी कैमरे
  • अग्निशमन यंत्र
  • फर्स्ट एड बॉक्स
  • पेयजल
  • शौचालय
  • बिजली व्यवस्था
  • पार्किंग
  • शुल्क पंजिका
  • स्कूल समय में संचालन

पहली नजर में यह सूची व्यापक दिखाई देती है।

लेकिन…

सबसे बड़ा सवाल सूची में ही नहीं

पूरे 17 बिंदुओं की जांच सूची में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि बिना पंजीकरण संचालित कोचिंग संस्थानों की पहचान कैसे होगी।

यही वह बिंदु है जिस पर पूरा मामला आकर टिक जाता है।

यदि कोई संस्थान पंजीकृत ही नहीं है तो क्या वह जांच के दायरे में आएगा?

यदि नहीं आएगा…

तो फिर सबसे ज्यादा जरूरत किसकी जांच की है?

टारगेट टीवी लाइव की पड़ताल में क्या मिला?

उपलब्ध पंजीकरण सूची का अवलोकन करने पर कई ऐसे चर्चित कोचिंग संस्थानों के नाम नहीं मिले—

  • जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं।
  • जिनके बड़े-बड़े विज्ञापन पूरे शहर में लगे हैं।
  • जिनकी हर साल बड़े स्तर पर एडमिशन प्रक्रिया चलती है।
  • जिनकी पहचान जिले के लगभग हर अभिभावक और छात्र को है।

यदि ये संस्थान पंजीकृत हैं तो उनका नाम सूची में क्यों नहीं है?

और यदि पंजीकृत नहीं हैं…

तो वर्षों से इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

15-20 वर्षों से चल रहे कई संस्थान

स्थानीय शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में अनेक कोचिंग संस्थान पिछले 15 से 20 वर्षों से लगातार संचालित हो रहे हैं।

इन संस्थानों में हर वर्ष हजारों छात्र प्रवेश लेते हैं।

शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर मुख्य मार्गों तक इनके बड़े-बड़े होर्डिंग लगे रहते हैं।

इसके बावजूद…

उपलब्ध रिकॉर्ड में इनकी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देती।

क्या केवल नियम मानने वालों की होगी जांच?

यही सबसे बड़ा प्रश्न है।

यदि किसी संस्थान ने नियमों का पालन करते हुए पंजीकरण कराया है…

तो वही निरीक्षण के दायरे में आएगा।

लेकिन जिसने पंजीकरण ही नहीं कराया…

क्या वह जांच से बाहर रहेगा?

यदि ऐसा होता है तो यह नियमों का पालन करने वालों के साथ भी अन्याय माना जाएगा।

क्या डीआईओएस कार्यालय के पास वास्तविक आंकड़े हैं?

यह जांच अब केवल कोचिंग संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है।

अब सवाल प्रशासनिक रिकॉर्ड पर भी उठ रहे हैं।

क्या जिले में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का अद्यतन रिकॉर्ड डीआईओएस कार्यालय के पास उपलब्ध है?

यदि है—

तो सूची में बड़े संस्थानों के नाम क्यों नहीं दिखाई दे रहे?

यदि नहीं—

तो पहले रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए या जांच?

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जांच अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू हो।

यदि केवल पंजीकृत संस्थानों की जांच होगी और बिना पंजीकरण चल रहे संस्थान बाहर रह जाएंगे तो अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती

अब प्रशासन को तीन बड़े प्रश्नों का उत्तर देना होगा—

1. जिले में कुल कितने कोचिंग सेंटर संचालित हैं?

2. उनमें से कितने विधिवत पंजीकृत हैं?

3. बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई?

यह भी जानिए: जांच के 17 प्रमुख बिंदु

  • भवन स्वयं का या किराये का
  • वैध किरायानामा
  • बेसमेंट में संचालन
  • शिक्षकों की संख्या
  • शिक्षकों की योग्यता
  • पढ़ाए जाने वाले विषय
  • छात्रों की संख्या
  • 16 वर्ष से कम आयु के छात्र
  • पर्याप्त फर्नीचर
  • अलग प्रवेश-निकास
  • अग्निशमन यंत्र
  • फर्स्ट एड बॉक्स
  • सीसीटीवी
  • शौचालय
  • बिजली
  • पेयजल
  • पार्किंग
  • शुल्क पंजिका
  • स्कूल समय में संचालन

TargetTvLive का विश्लेषण

कोचिंग संस्थानों की जांच निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है।

लेकिन यदि जांच केवल उन्हीं संस्थानों तक सीमित रह जाती है जो पहले से पंजीकृत हैं और जिनकी जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध है, जबकि सबसे अधिक छात्र संख्या वाले और संभावित रूप से अपंजीकृत संस्थान जांच के दायरे से बाहर रह जाते हैं, तो इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पारदर्शिता की दृष्टि से प्रशासन को जिले में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की अद्यतन सूची सार्वजनिक करनी चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि किन संस्थानों का पंजीकरण वैध है तथा किनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

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