“या तो रजिस्ट्रेशन… या फिर लाइसेंस खत्म!”—कीटनाशी विक्रेताओं पर विभाग का सबसे बड़ा एक्शन
23 अप्रैल डेडलाइन: 829 तक सिमटा आंकड़ा, हजारों पर लटक रही तलवार
📍 बिजनौर/लखनऊ | ✍️ अवनीश त्यागी, TargetTvLive
जनपद के कीटनाशी कारोबारियों के लिए यह खबर चेतावनी ही नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई का ऐलान है। कृषि विभाग अब पूरी तरह एक्शन मोड में है और साफ शब्दों में कह चुका है—“IPMS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं तो लाइसेंस नहीं!”
डेडलाइन निकली… अब सीधे सस्पेंशन!
अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा), उत्तर प्रदेश के आदेश के मुताबिक
18 अप्रैल 2026 अंतिम तारीख थी, लेकिन हैरानी की बात ये है कि
👉 20 अप्रैल तक सिर्फ 829 विक्रेता ही रजिस्ट्रेशन करा सके।
यानी बड़ी संख्या में व्यापारी अब भी नियमों को हल्के में ले रहे हैं—और यही लापरवाही अब भारी पड़ने वाली है।
अब क्या होगा? समझिए सीधा गणित
- 18 अप्रैल तक रजिस्ट्रेशन नहीं = लाइसेंस सस्पेंड
- 2 दिन का “लास्ट चांस” दिया गया
- 23 अप्रैल के बाद = लाइसेंस हमेशा के लिए खत्म
विभाग ने साफ कर दिया है कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
कीटनाशी अधिनियम 1968 और नियमावली 1971 के तहत सीधी कार्रवाई होगी।
बार-बार चेतावनी… फिर भी अनदेखी
कृषि विभाग ने एक-दो नहीं, बल्कि कई बार नोटिस और प्रेस विज्ञप्ति जारी की, लेकिन उसके बावजूद व्यापारी गंभीर नहीं दिखे।
अब विभाग ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा—“अब केवल कार्रवाई होगी, चेतावनी नहीं।”
बाजार में डर का माहौल
इस फैसले के बाद पूरे जनपद में कीटनाशी विक्रेताओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
कई दुकानदार अब आनन-फानन में पोर्टल पर पंजीकरण कराने में जुट गए हैं, ताकि उनका कारोबार बच सके।
क्यों जरूरी है IPMS पोर्टल?
IPMS (Integrated Pest Management System) केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि—
✔️ नकली दवाओं पर रोक
✔️ बिक्री में पारदर्शिता
✔️ किसानों को सुरक्षित उत्पाद की गारंटी
TargetTvLive का सीधा संदेश
अब वक्त निकल चुका है—
जो जाग गया, उसका लाइसेंस बचेगा… जो सोता रहा, उसका कारोबार खत्म!
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