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‘खूनी खेल’ पर खाकी कटघरे में! पेट फाड़ने वाले आरोपी को थाने से छोड़ने का आरोप

‘खूनी खेल’ पर खाकी कटघरे में! पेट फाड़ने वाले आरोपी को थाने से छोड़ने का आरोप

बहन की उंगलियां कटीं, भाई की बाहर आई आंतें… पिता का फूटा गुस्सा — “क्या बेटे की मौत के बाद जागेगी पुलिस?”

बिजनौर/अफजलगढ़
बिजनौर के अफजलगढ़ में हुई खूनी वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। छेड़खानी का विरोध करने पर घर में घुसकर युवक पर जानलेवा हमला, बहन की कटी उंगलियां और फिर पुलिस पर मुख्य आरोपियों को छोड़ने के आरोप… इस पूरे मामले ने खाकी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद से इलाके में एक ही चर्चा है — क्या सच में खूनी हमले के आरोपी थाने से ही छोड़ दिए गए?

घर में घुसकर बरसाए चाकू-बल्लम

घटना 28 मई की बताई जा रही है। मोहल्ला नायक सराय निवासी कयामुद्दीन के मुताबिक उनके बेटे बिलाल ने मोहल्ले में हो रही कथित छेड़खानी का विरोध किया था। इसी बात से नाराज होकर 7 लोग घर में घुस आए और बिलाल पर चाकू व बल्लम से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

हमला इतना खतरनाक था कि बिलाल की आंतें बाहर आ गईं। घर में चीख-पुकार मच गई। भाई को बचाने दौड़ी बहन अदीबा पर भी हमला हुआ, जिसमें उसके दाहिने हाथ की दो उंगलियां कटकर जमीन पर गिर गईं।

खून से लथपथ दोनों भाई-बहनों को 112 पुलिस सीएचसी अफजलगढ़ लेकर पहुंची, जहां से उन्हें बिजनौर जिला अस्पताल और बाद में मेरठ रेफर कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक बिलाल की हालत अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है।

“मुख्य आरोपी को पैसे लेकर छोड़ दिया”

पीड़ित परिवार ने थाना अफजलगढ़ पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कयामुद्दीन का कहना है कि उन्होंने घटना वाले दिन ही सात नामजद आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत के मुताबिक कार्रवाई नहीं की।

परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपी निजाम और इस्लामुद्दीन को पकड़ने के बाद कथित तौर पर मोटी रकम लेकर छोड़ दिया गया।

«“मेरी बेटी की कटी उंगलियां जमीन पर पड़ी थीं… बेटे की आंतें हाथ में लेकर अस्पताल भागे। डॉक्टर कह रहे हैं 50-50 चांस है और पुलिस बोल रही है तुम्हें कोई चढ़ा रहा है। क्या पुलिस मेरे बेटे की मौत का इंतजार कर रही है?”»

यह बयान अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

FIR पर भी सवाल, पुलिस पर बढ़ा दबाव

परिवार का आरोप है कि घटना के वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और 112 की जीडी होने के बावजूद पुलिस ने उनकी मूल तहरीर के अनुसार मुकदमा दर्ज नहीं किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतने गंभीर मामले में भी आरोपी खुले घूम रहे हैं, तो आम आदमी पुलिस पर भरोसा कैसे करेगा?

इलाके में यह मामला अब कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बन चुका है।

CM दौरे से पहले बढ़ी प्रशासन की मुश्किल

मुख्यमंत्री के संभावित बिजनौर दौरे से पहले सामने आए इस सनसनीखेज मामले ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है और लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गंभीर वारदात के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई क्यों बरती जा रही है।

पुलिस ने क्या कहा?

थाना अफजलगढ़ पुलिस ने पैसे लेकर आरोपी छोड़ने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है और मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, पुलिस के इस बयान के बाद भी लोगों के मन में कई सवाल अब भी बाकी हैं।

पीड़ित परिवार की मांग

पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक बिजनौर से मांग की है कि—

– पूरे मामले की जांच सीओ स्तर के अधिकारी से कराई जाए
– सभी नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए
– आरोपी छोड़ने के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो
– परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए
– दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए

इलाके में चर्चा के केंद्र बने ये सवाल

– क्या मुख्य आरोपियों को सच में छोड़ दिया गया?
– आखिर गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है?
– क्या पीड़ित की असली तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ?
– क्या गंभीर घायल युवक को इंसाफ मिल पाएगा?

अफजलगढ़ का यह मामला अब सिर्फ एक मारपीट नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और जनता के भरोसे की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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