“वेतन नहीं तो काम बंद किया!” — NHM कर्मचारियों का सरकार को अल्टीमेटम, 2 मई से स्वास्थ्य सेवाएं ठप अल्टीमेटम
दो महीने से नहीं मिला मानदेय, बच्चों की फीस तक भरने के लिए तरस रहे स्वास्थ्यकर्मी, बिजनौर से उठी चिंगारी पूरे यूपी में भड़का सकती है बड़ा आंदोलन
बिजनौर। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत काम कर रहे हजारों संविदा कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को सीधी चेतावनी दे दी है — “20 मई तक भुगतान नहीं हुआ तो 21 मई से No Pay-No Work लागू होगा।”
बिजनौर से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार दो महीने से वेतन न मिलने के कारण उनके घरों का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, राशन और दवाइयों तक के लिए लोग परेशान हैं।
“सेवा पूरी, लेकिन वेतन अधूरा” — कर्मचारियों में फूटा आक्रोश
उ०प्र० राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ, बिजनौर इकाई द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में साफ कहा गया है कि कर्मचारी लगातार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें समय पर मानदेय तक नहीं मिल रहा।
स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि सरकार और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट झेलने को मजबूर हैं।
स्कूल खुले, लेकिन कर्मचारियों की जेब खाली
मई-जून में नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावकों पर खर्च का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में NHM कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों की फीस और पढ़ाई का खर्च उठाने की है।
कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ड्यूटी करने के बावजूद जब वेतन नहीं मिलता तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। कई कर्मचारियों को उधार लेकर घर का खर्च चलाना पड़ रहा है।
21 मई से “No Pay-No Work”, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
संघ ने अपने ज्ञापन में साफ कर दिया है कि यदि 20 मई 2026 तक लंबित भुगतान नहीं हुआ तो 21 मई से जिले के समस्त NHM संविदा कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
इस चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि NHM कर्मचारी अस्पतालों, टीकाकरण, मातृ-शिशु सेवाओं और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
अगर कर्मचारियों ने काम बंद किया तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार के लिए बढ़ सकती है मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मामला जल्द नहीं सुलझा तो यह आंदोलन सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी विरोध का रूप ले सकता है।
संविदा कर्मचारी पहले भी समय पर वेतन, नौकरी सुरक्षा और नियमितीकरण जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में लगातार वेतन लटकने से असंतोष और ज्यादा बढ़ गया है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, भारतीय मजदूर संघ और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार और जिला मंत्री गगन कुमार शर्मा ने प्रशासन से तत्काल भुगतान जारी कराने की मांग की है।
सवाल बड़ा है —
“जो स्वास्थ्यकर्मी जनता की सेवा कर रहे हैं, आखिर उनके परिवारों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?”
रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
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