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बिजनौर में जद(यू) का बड़ा सियासी आरोप: ‘प्रशासनिक उत्पीड़न’ के खिलाफ डीएम दरबार में दस्तक, आंदोलन की चेतावनी

बिजनौर में जद(यू) का बड़ा सियासी आरोप: ‘प्रशासनिक उत्पीड़न’ के खिलाफ डीएम दरबार में दस्तक, आंदोलन की चेतावनी

 

“पुलिस अपशब्द बोले, शिकायतें दबाईं गईं”, जद(यू) प्रदेश नेतृत्व का प्रशासन पर सीधा हमला

बिजनौर | 29 दिसंबर 2025

बिजनौर में सियासत उस वक्त गरमा गई जब जनता दल (यूनाइटेड) उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रतिनिधि मंडल ने जिला प्रशासन पर पक्षपात, राजनीतिक उत्पीड़न और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। मामला सीधे तौर पर जद(यू) जिलाध्यक्ष रिजवान खान और पार्टी कार्यकर्ताओं से कथित प्रशासनिक व्यवहार से जुड़ा है, जिसे पार्टी ने “सुनियोजित दबाव” करार दिया है।

‘न्याय की सुनवाई बंद’—जद(यू) का प्रशासन पर सीधा आरोप

प्रदेश महासचिव रणवीर सिंह के नेतृत्व में पहुँचे प्रतिनिधि मंडल ने आरोप लगाया कि

  • पुलिस प्रशासन द्वारा पार्टी को अपशब्दों में संबोधित किया गया,
  • कार्यकर्ताओं की वैध शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है,
  • और जिला एवं ग्रामीण मामलों से दूर रहने की चेतावनी देकर राजनीतिक गतिविधियों को दबाया जा रहा है।

जद(यू) नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे संगठन को हतोत्साहित करने की कोशिश है।

कौन-कौन रहा प्रतिनिधि मंडल में शामिल?

ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश और जिला स्तर के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं—
प्रदेश सचिव भानु प्रताप सिंह, प्रदेश सचिव आदेश यादव,
अनमोल चौधरी (ओबीसी जिला अध्यक्ष, बिजनौर),
परवल चौहान, पंडित सूरज,
मनीष कश्यप (मंडल सचिव, मुरादाबाद),
रोमा चौधरी (जिला महिला अध्यक्ष, बिजनौर)
सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता।

राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक लापरवाही? बड़ा सवाल

डिजिटल राजनीति के दौर में यह सवाल अहम हो जाता है कि—
👉 क्या यह मामला प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठता सवाल है?
👉 या फिर स्थानीय सत्ता संतुलन में बदलते समीकरणों का संकेत?

विशेषज्ञ मानते हैं कि विपक्षी दलों पर प्रशासनिक दबाव के आरोप आने वाले चुनावी वर्ष से पहले सियासी तापमान बढ़ा सकते हैं

शांतिपूर्ण प्रदर्शन, लेकिन सख्त चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के बाद जद(यू) कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने साफ शब्दों में कहा—

“यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच और उत्पीड़न पर रोक नहीं लगी, तो पार्टी आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”

सामाजिक न्याय बनाम सत्ता—आगे क्या?

जनता दल (यूनाइटेड) ने दोहराया कि वह
सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और
किसी भी स्तर पर अन्याय को स्वीकार नहीं करेगी।

अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—
👉 क्या होगी निष्पक्ष जांच?
👉 या यह मामला और बड़े आंदोलन की भूमिका बनेगा?

 

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