रिंग कांपी, पहाड़ गरजे!
कण्वनगरी से उठा मुक्कों का तूफ़ान—पौड़ी और पिथौरागढ़ ने लिख दिया बॉक्सिंग का नया इतिहास
कोटद्वार | 29 दिसंबर 2025
जब रिंग में पहली घंटी बजी…
तो यह सिर्फ मुकाबले की शुरुआत नहीं थी,
यह देवभूमि के भविष्य की दस्तक थी।
8वीं उत्तराखंड राज्य जूनियर अंडर-17 बॉक्सिंग चैंपियनशिप का फाइनल दिन कण्वनगरी में नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के खेल इतिहास में गूंजा।
यहाँ मुक्के चले—लेकिन सिर्फ विरोधी पर नहीं, सीमाओं और बहानों पर।
पहाड़ों का ऐलान: “हम तैयार हैं नेशनल के लिए!”
- 🥇 बालक वर्ग चैंपियन – पौड़ी गढ़वाल
- 🥇 बालिका वर्ग चैंपियन – पिथौरागढ़ हॉस्टल
👉 यह जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं थी,
👉 यह जवाब था उन सवालों का—“क्या पहाड़ों से चैंपियन निकलते हैं?”
13 भार वर्ग, 24 मुकाबले, और एक ही संदेश
देवभूमि अब बॉक्सिंग पावरहाउस है
रिंग में फौलादी मुक्के थे,
आँखों में भूख थी,
और हर पंच के साथ एक ही नारा—
“अब हमारी बारी है!”
रिंग के ‘सुल्तान’: जिन पर टिकी है उम्मीद
बेस्ट बॉक्सर
- अभिषेक (पौड़ी) – मुक्कों में ताकत, दिमाग में रणनीति
- भूमिका बसेड़ा (बागेश्वर) – हर राउंड में आत्मविश्वास की बारिश
मोस्ट प्रॉमिसिंग
- अंशिका आर्य (पिथौरागढ़)
- प्रत्यूष नेगी (रुद्रप्रयाग)
👉 ये नाम नहीं,
👉 आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चेहरे हैं।
मेडल टैली ने खोल दी आँखें
बालिका वर्ग: पिथौरागढ़ का अटूट किला
- माया राय
- गोदावरी
- दिया कठैत
- रिया जोशी
- रिया तोलिया
🏆 ओवरऑल चैंपियन: पिथौरागढ़ हॉस्टल
बालक वर्ग: पौड़ी का ‘नो-मैच’ दबदबा
- धर्मेंद्र
- विशाल
- अंशवीर
- अभिषेक
- लक्की
- प्रत्यूष
🏆 ओवरऑल चैंपियन: पौड़ी जिला
👉 साफ है—टैलेंट मैदान में बोल रहा है, सिफारिशें चुप हैं।
ऋतु खंडूरी का ऐलान: “ये ओलंपिक की नर्सरी है”
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने मंच से जो कहा,
वह सिर्फ भाषण नहीं—भविष्य की घोषणा थी:
“ये मुक्केबाज तिरंगा उठाने की तैयारी में हैं।
यह रिंग देवभूमि के ओलंपिक सितारे गढ़ रही है।”
जब दिग्गज रिंग के किनारे खड़े हों…
कैप्टन देवी चंद,
डीसी भट्ट,
देवेंद्र सिंह जीना, जोगेंद्र सिंह बोरा,
अजय सिंह (BFI),
मुखर्जी निर्वाण, गोपाल खोलिया—
👉 जब इतने नाम एक साथ हों,
👉 तो समझ लीजिए—कुछ बड़ा बन रहा है।
अब अगला पड़ाव: नेशनल, फिर इंटरनेशनल!
यहीं से चुनी जाएगी उत्तराखंड की गोल्डन टीम,
जो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में
पूरे देश को बताएगी—पहाड़ सिर्फ सुंदर नहीं, ताकतवर भी हैं।
क्यों वायरल है यह चैंपियनशिप?
- ✅ छोटे जिलों से निकले बड़े चैंपियन
- ✅ बेटियों का बराबरी से वर्चस्व
- ✅ बिना शोर-शराबे के परिणाम
- ✅ सिस्टम नहीं, स्किल की जीत
अंतिम पंच
यह सिर्फ बॉक्सिंग इवेंट नहीं था।
यह चेतावनी थी—
उत्तराखंड आ रहा है… रिंग पर राज करने!











