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सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली बचाने की जंग तेज, भगत सिंह जयंती पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का संकल्प

  सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली बचाने की जंग तेज

भगत सिंह जयंती पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का संकल्प

“निजीकरण के खिलाफ अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे बिजली कर्मी”

लखनऊ, 28 सितम्बर 2025।
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने का संकल्प लिया। ऑनलाइन आयोजित बैठक में समिति ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा ही गरीब और आम जनता के हितों की रक्षा है, और इसे बचाने के लिए बिजली कर्मचारी अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।

भगत सिंह के सपनों का भारत और बिजली का निजीकरण

बैठक में समिति ने शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज़ादी अनगिनत क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली है।
लेकिन आज उन्हीं बलिदानों के बाद बनी जनता की हजारों करोड़ की संपत्तियां कौड़ियों के दाम पर चुनिंदा घरानों को सौंपना, क्रांतिकारियों के सपनों और स्वतंत्रता संग्राम की भावना के साथ सीधा विश्वासघात है।

बिजली – सेवा बनाम व्यापार

समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि—

  • आज़ादी के बाद बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में रखने का उद्देश्य गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी और क्रॉस-सब्सिडी के माध्यम से राहत देना था।
  • सार्वजनिक क्षेत्र में गरीबों को लागत से कम दाम पर बिजली दी जाती है, जबकि कॉरपोरेट घरानों के लिए बिजली महज़ मुनाफे का साधन है।
  • निजीकरण होते ही गरीब और मध्यम वर्ग को सबसे ज़्यादा मार झेलनी पड़ेगी।

42 गरीब जनपदों पर खतरा

समिति ने खासतौर पर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 गरीब जनपदों का मुद्दा उठाया।
इन जनपदों की बिजली अगर निजी कंपनियों के हवाले कर दी गई, तो यह प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों के विकास के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ होगा।

बढ़ती दरों का अंदेशा

समिति ने खुलासा किया कि—

  • पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पहले ही 45% तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेज चुका है।
  • इस बढ़ोतरी से घरेलू बिजली 13 रुपये प्रति यूनिट तक महंगी हो जाएगी।
  • निजीकरण के बाद दरें कम से कम तीन गुनी बढ़ने का खतरा है।

अरबों की संपत्ति, औने-पौने दाम

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि—

  • लगभग एक लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को मात्र 6500 करोड़ रुपये रिज़र्व प्राइस पर बेचने की योजना बनाई गई है।
  • 42 जनपदों की जमीन मात्र एक रुपये की लीज़ पर निजी घरानों को दी जाएगी।
    यह जनता की गाढ़ी कमाई और प्रदेश की संपत्ति को कौड़ियों में लुटाने की साज़िश है।

व्यापक जनसंपर्क और संघर्ष की तैयारी

भगत सिंह जयंती पर प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ ही निजीकरण एवं उत्पीड़न के खिलाफ जनपदों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया।
संघर्ष समिति ने ऐलान किया कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है और किसी भी कीमत पर सार्वजनिक क्षेत्र का बलिदान नहीं होने दिया जाएगा।

✍️ संपादकीय टिप्पणी

बिजली महज़ एक सुविधा नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक न्याय का आधार है।
सार्वजनिक क्षेत्र में इसका बने रहना गरीबों और वंचितों के लिए जीवनरेखा है। अगर बिजली निजी हाथों में गई तो यह सिर्फ कारोबार बनकर रह जाएगी और समाज का सबसे बड़ा तबका इससे वंचित हो जाएगा।
शहीद भगत सिंह की जयंती पर लिया गया यह संकल्प केवल बिजली कर्मचारियों की लड़ाई नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।

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