काशी की सड़कों का बोझ हल्का करेगा देश का पहला अर्बन रोपवे
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वाराणसी से अनिल सिंह की खास रिपोर्ट — संकरी गलियों, भीड़-भाड़ और ट्रैफिक जाम से जूझते वाराणसी को अब एक नया तोहफ़ा मिलने जा रहा है। यह तोहफ़ा न सड़क पर चलेगा, न रेल की पटरियों पर—बल्कि हवा में दौड़ेगा। जी हां, वाराणसी देश का पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है जहां शहरी परिवहन के तौर पर अर्बन रोपवे का इस्तेमाल होगा।
क्यों खास है वाराणसी का रोपवे?
वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने साफ किया है कि रोपवे को लेकर जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं वे पूरी तरह निराधार हैं। उनका कहना है:
- रोपवे सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा देगा।
- इसमें इस्तेमाल होने वाले गोंडोला पूरी तरह ऑटोमेटेड होंगे।
- यात्री इनमें दरवाज़ा या कोई अन्य सिस्टम खुद नहीं खोल पाएंगे — यानी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं।
गर्ग का दावा है कि जैसे ही यह शुरू होगा, काशीवासी अपनी तरह का यह अनूठा ट्रांसपोर्ट सिस्टम इस्तेमाल कर पाएंगे।
रूट और स्टेशन
रोपवे का पहला चरण करीब 3.75 किलोमीटर लंबा होगा, जो कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक चलेगा।
- कुल 5 स्टेशन बनेंगे: कैंट रेलवे स्टेशन, कचहरी, राठयatra, गिरजाघर और गोदौलिया।
- अभी जहां यह दूरी सड़क से तय करने में 45–50 मिनट लगते हैं, वहीं रोपवे इसे महज़ 15–16 मिनट में पूरा करेगा।
लागत और पैमाना
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की लागत करीब ₹645 से ₹807 करोड़ बताई जा रही है।
- यह योजना राष्ट्रीय रोपवे कार्यक्रम के तहत लागू हो रही है।
- निर्माण की जिम्मेदारी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी टीम के पास है।
सुरक्षा और तकनीक
- गोंडोला पूरी तरह मेकैनिकल-ऑटोमेटेड सिस्टम पर आधारित होंगे।
- हर स्टेशन पर लिफ्ट, रैंप और विकलांग सुविधाएं दी जाएंगी।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत लगातार ट्रायल रन किए जा रहे हैं।
कब चलेगा रोपवे?
पहले चरण के तहत एक-एक गोंडोला पर ट्रायल रन शुरू हो चुका है। अब धीरे-धीरे और गोंडोला जोड़कर पूरे रूट का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही यात्री सेवा शुरू हो जाएगी।
शहर को क्या फायदा होगा?
- ट्रैफिक जाम में राहत — रोज़ाना लाखों यात्रियों का बोझ कम होगा।
- समय की बचत — सड़क की तुलना में एक-तिहाई समय में यात्रा पूरी।
- पर्यटन को बढ़ावा — गंगा घाट और काशी विश्वनाथ धाम आने वाले पर्यटकों के लिए नया आकर्षण।
- पर्यावरण हितैषी — प्रदूषण और ईंधन की खपत में कमी।
- लोकल इकोनॉमी को बढ़ावा — स्टेशनों पर दुकानों, कैफे और सुविधाओं से स्थानीय रोजगार।
❓ लेकिन सवाल भी हैं
जहां एक ओर रोपवे से काशी का चेहरा बदलने की उम्मीदें हैं, वहीं कुछ आलोचक इसके उच्च लागत, समयसीमा में देरी और दीर्घकालिक रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा, बनारस जैसे ऐतिहासिक शहर में निर्माण के चलते पारंपरिक ढाँचे पर असर की चिंताएँ भी सामने आई हैं।
निष्कर्ष
वाराणसी का रोपवे प्रोजेक्ट सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि भविष्य का संकेत है। यदि यह तय मानकों के अनुसार सफल रहा, तो न सिर्फ बनारस की सड़कों का बोझ हल्का होगा बल्कि यह पूरे देश में अर्बन रोपवे परिवहन के लिए एक मॉडल बन सकता है।
काशीवासियों के लिए यह सचमुच “हवा में उड़ने जैसा सफर” साबित होगा।











