वेतन रोके जाने और निजीकरण के विरोध में उफना गुस्सा
प्रदेशभर में 276वें दिन भी बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी
हाइलाइट्स
-
तीन माह से कई हजार बिजली कर्मियों का वेतन बकाया
-
संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छटनी से बिजली व्यवस्था प्रभावित
-
महिला कर्मचारियों को भी दूरस्थ स्थानों पर जबरन ट्रांसफर
-
9 माह से निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ जारी है आंदोलन
-
आज 25 से अधिक जिलों और परियोजनाओं में विरोध प्रदर्शन
आंदोलन की जड़: वेतन और निजीकरण का संकट
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बड़ा आरोप लगाया है कि तीन माह से कई हजार बिजली कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है।
- जून और जुलाई का वेतन फेसियल अटेंडेंस विवाद में रोका गया।
- अगस्त माह का भी वेतन अब तक नहीं मिला।
- बिजली कर्मी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं, फिर भी उन्हें वेतन न मिलना “अमानवीय और उत्पीड़न की पराकाष्ठा” करार दिया गया।
संविदा कर्मियों की छटनी से बिगड़ी व्यवस्था
मई महीने में निजीकरण की तैयारी के नाम पर हजारों संविदा कर्मियों की छटनी कर दी गई।
- 55 वर्ष की आयु पूरी करने वाले संविदा कर्मियों को निकाला गया।
- “डाउनसाइजिंग” के नाम पर हजारों कर्मचारियों की नौकरी छीन ली गई।
- संघर्ष समिति का दावा है कि इस फैसले से कई जिलों में बिजली व्यवस्था चरमराई।
उत्पीड़नात्मक तबादले और महिला कर्मियों की दुश्वारी
समिति ने आरोप लगाया कि आंदोलन से नाराज़ प्रबंधन ने
- हजारों बिजली कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के विपरीत दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर कर दिया।
- महिला कर्मचारियों को भी सिर्फ इसलिए दूरदराज भेजा गया क्योंकि वे कार्यालय समय के बाद आंदोलन की बैठकों में शामिल हो रही थीं।
स्मार्ट मीटर विवाद और रियायती सुविधा खत्म
निजीकरण की दिशा में एक और कदम के रूप में
- कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाली रियायती बिजली सुविधा खत्म की जा रही है।
- इसके लिए उनके घरों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
276वें दिन भी संघर्ष तेज
आंदोलन को 9 माह पूरे हो चुके हैं।
- आज 276वें दिन वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, अलीगढ़, बरेली, अयोध्या, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद, झांसी, मथुरा समेत 25 से अधिक जिलों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
- संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं होता और सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जातीं।
उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों का संघर्ष अब केवल वेतन या नौकरी का सवाल नहीं रह गया है। यह आंदोलन निजीकरण बनाम कर्मचारियों की सुरक्षा की जंग का रूप ले चुका है।
अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।













