बिजनौर में उर्वरक गोदामों का औचक निरीक्षण: स्टॉक में पारदर्शिता, किसानों को राहत

👉 07 अगस्त 2025 | बिजनौर | कृषि संवाददाता
बिजनौर में सहकारिता विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आज जिले के प्रमुख उर्वरक गोदामों और विक्रेताओं पर सघन निरीक्षण अभियान चलाया। जिलेभर में लगातार आ रही किसानों की शिकायतों और खरीफ सीजन में बढ़ी मांग को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया।
7 प्रमुख प्रतिष्ठानों का किया गया निरीक्षण
अधोहस्ताक्षरी सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने जिले के निम्न प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया:
- मै० पीसीएफ बफर केंद्र, चक्कर रोड
- मै० चांदपुर सहकारी क्रय-विक्रय समिति, बिजनौर
- मै० जिला सहकारी संघ लि., बिजनौर
- मै० आईएफएफडीसी कृषक सेवा केंद्र, फरीदपुर उद्दा
- मै० बी-पैक्स, भरैरा
- मै० ओम ट्रेडिंग कंपनी, विदुर कुटी रोड
भौतिक स्टॉक और पोर्टल डेटा में 100% मेल
- उर्वरकों का आईएफएमएस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से भौतिक स्टॉक का मिलान किया गया।
- यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी सहित सभी उर्वरक पोर्टल पर दर्ज मात्रा के अनुसार सही मात्रा में मौजूद पाए गए।
निर्देश जारी: कोई कोताही नहीं चलेगी
निरीक्षण के दौरान सहायक आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए:
- किसानों की मांग के अनुसार तत्काल उर्वरकों की आपूर्ति की जाए।
- गोदामों में वैज्ञानिक ढंग से भंडारण सुनिश्चित किया जाए।
- उर्वरकों की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो।
ओवर रेटिंग और टैगिंग पर सख्त नजर
- कहीं भी ओवर रेटिंग या टैगिंग (मुख्य उर्वरकों के साथ गैर-जरूरी उत्पाद जोड़ना) की शिकायत नहीं मिली।
- फिर भी सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं को कड़ी हिदायत दी गई।
बिना POS मशीन कोई बिक्री नहीं
- उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि बिना POS मशीन के उर्वरक वितरण न करें।
- बल्क में बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित।
- किसानों को जोतबही/खतौनी और फसलवार सिफारिश के अनुसार ही उर्वरक वितरण किया जाए।
उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
- यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक पर बिक्री या टैगिंग करता पाया गया तो:
- उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985
- आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955
के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
रसीद देना अनिवार्य
- सभी विक्रेताओं को हर विक्रय पर रसीद देना अनिवार्य किया गया है, जिससे किसानों को पूरी पारदर्शिता के साथ उर्वरक प्राप्त हो सके।
विश्लेषण | किसानों को मिला भरोसा, काला बाजारी पर सख्ती का असर
✔️ यह निरीक्षण अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की प्रशासनिक कोशिश है।
✔️ खरीफ फसलों की बुवाई के दौर में इस तरह की सक्रियता किसानों को राहत देती है।
✔️ यदि इस प्रकार की निगरानी लगातार बनी रही तो उर्वरक माफियाओं की कमर टूट सकती है।
डिजिटल किसानों से अपील:
अगर आपको किसी उर्वरक विक्रेता द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूल किया जाता है या टैगिंग की जाती है, तो तत्काल संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
🖊️ रिपोर्ट: Target TV Live, बिजनौर












