बासमती धान की पैदावार को वैज्ञानिक आधार, जैविक खेती और निर्यात की दिशा में बढ़ा एक मजबूत कदम!

इस्सोपुर टील में किसान जागरूकता कार्यशाला आयोजित, जीआई टैग धान की खेती पर खास जोर
रिपोर्टर: कांधला, शामली | स्थान: इस्सोपुर टील
मुख्य बातें (News Highlights):
✅ बासमती धान उत्पादन पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
✅ कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग और जैविक खेती पर जोर
✅ किसानों को मिली GI टैग वाली बासमती किस्मों की पहचान की तकनीकी जानकारी
✅ फार्म ट्रैप, लाइट ट्रैप, जीवामृत जैसे जैविक तरीकों को अपनाने पर बल
✅ किसानों को वितरित किए गए श्री अन्न (सांवा, रागी) के मिनिकिट
✅ फसल विविधीकरण और मक्का विकास पर भी विस्तार से जानकारी
✅ निर्यात के जरिए विदेशी मुद्रा अर्जित कर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम
रिपोर्ट विश्लेषण | कृषि परिवर्तन की धरातल पर बुनियाद
इस्सोपुर टील में आयोजित बासमती धान उत्पादन कार्यशाला ने साफ संकेत दिया कि कृषि अब पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर वैज्ञानिक और निर्यात उन्मुख होती जा रही है। भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के वैज्ञानिकों ने साफ किया कि अब केवल फसल उगाना काफी नहीं — उत्पादन की गुणवत्ता, जैविकता और निर्यात के मानक उतने ही जरूरी हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व:
- विधान परिषद सदस्य वीरेन्द्र सिंह
- ब्लॉक प्रमुख डॉ. विनोद मलिक
- मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी
- कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी संदीप चौधरी
- एपीडा वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा
- उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार
- जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार
प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया गया?
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जीआई टैग वाली बासमती किस्मों की पहचान और चयन की वैज्ञानिक विधि
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जैविक खेती तकनीक: जीवामृत, फैरोमैन ट्रैप, लाइट ट्रैप
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IPM (एकीकृत कीट प्रबंधन) अपनाकर कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग
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फसल कटाई के बाद सफाई, भंडारण, मिलिंग और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया
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APEDA की योजनाओं और GI प्रमाणन से जुड़ी जानकारी
क्या बोले अधिकारी और जनप्रतिनिधि?
मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी — “बासमती धान का गुणवत्तापूर्ण निर्यात देश को विदेशी मुद्रा दिलाकर अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।”
डॉ. विनोद मलिक — “जल संरक्षण करते हुए धान की खेती के साथ-साथ सांवा और रागी जैसे पोषक अनाजों को भी अपनाना चाहिए।”
विधान परिषद सदस्य वीरेन्द्र सिंह — “किसानों को तकनीकी जानकारी से लैस करना ही विकास का मूल मंत्र है।”
किसानों के लिए लाभ:
- मिनिकिट के रूप में मुफ्त बीज वितरण
- सरकारी योजनाओं की जानकारी एक जगह
- जैविक और निर्यात-योग्य खेती की दिशा में सीधा मार्गदर्शन
इस प्रशिक्षण कार्यशाला ने किसानों के लिए न केवल बासमती धान की खेती को और अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित बनाया, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अब समय है कि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर गुणवत्ता, जैविकता और निर्यात की दिशा में ठोस पहल करें।
कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, ब्लॉक स्तर के प्रतिनिधि व सैकड़ों किसानों की भागीदारी ने इस आयोजन को सफल और प्रभावशाली बनाया।
✍️ रिपोर्ट – Target TV Live | शामली












