भुईयार समाज की एकता और उत्थान की ओर बढ़ते कदम

बिजनौर/शादीपुर । भुईयार समाज उत्थान समिति की क्षेत्रीय बैठक ग्राम शादीपुर में उत्साह और समर्पण के साथ संपन्न हुई। यह बैठक न केवल सामाजिक संगठन की मजबूती का प्रतीक बनी, बल्कि समाज को संगठित, शिक्षित और जागरूक करने के महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ एक नई दिशा भी मिली।
बैठक की अध्यक्षता यादराम सिंह (जीवनपुर) ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी महामंत्री बलजीत सिंह ने निभाई। समिति के अध्यक्ष करण पाल सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष बलवंत सिंह, कोषाध्यक्ष सुभाष सिंह, और अन्य प्रमुख पदाधिकारी जैसे नरेंद्र सिंह, मास्टर ओमकार सिंह, पवन कुमार, और संदीप कुमार की उपस्थिति ने बैठक की गंभीरता और उद्देश्यपूर्णता को और मजबूत किया।
समाज के उत्थान पर केंद्रित संवाद
बैठक के दौरान वक्ताओं ने समाज की वर्तमान स्थिति, शिक्षा की आवश्यकता और एकजुटता पर अपने विचार साझा किए। समिति के संरक्षक और संस्थापक राजपाल भुईयार ने समाज को एकजुट रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और संत कबीर साहेब के प्रकाटयोत्सव (11 जून) को भव्यता से मनाने का आह्वान किया। संत कबीर की शिक्षाओं के माध्यम से समाज को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
नए नेतृत्व का गठन — एक मजबूत कदम
बैठक में ग्राम शादीपुर की क्षेत्रीय समिति का गठन किया गया, जिसमें नाथे सिंह को संरक्षक, पूर्व प्रधान जयवीर सिंह को अध्यक्ष, और पूर्व प्रधान सोमदत्त सिंह को उपाध्यक्ष चुना गया। नरेंद्र सिंह को महामंत्री, विपिन कुमार को मंत्री, नीरज सिंह को संगठन मंत्री, और सोमपाल सिंह को प्रचार मंत्री बनाया गया। बलवीर सिंह, महेंद्र सिंह, मुनेश्वर सिंह, और विनोद कुमार को कार्यकारिणी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। यह टीम गांव-गांव जाकर समाज के मुद्दों को उठाएगी और उनके समाधान की दिशा में कार्य करेगी।
समाज के भविष्य की नई दिशा
बैठक में शादीपुर, जीवनपुर, बनखला, सिकैड़ा, पमडावली, सलेमपुर गधैली, बेगावाला, खुरमपुर, सहसवाला जैसे कई गांवों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि भुईयार समाज के लोग अपने अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए जागरूक हो रहे हैं। यह बैठक सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की आत्मा को जगाने वाला मंच बन गई।
समिति की यह पहल भुईयार समाज के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है, बशर्ते संगठन की ऊर्जा को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए और शिक्षा, सामाजिक सुधार, और सांस्कृतिक एकता को आधार बनाया जाए। यदि यह जागरूकता निरंतर बनी रही, तो भुईयार समाज निश्चित रूप से एक मजबूत और आत्मनिर्भर समुदाय के रूप में उभरेगा।












