क्या फ्री राशन के लिए नया मोबाइल खरीदना जरूरी है? बिजनौर जिला पूर्ति अधिकारी के बड़े खुलासे से दूर हुआ भ्रम!
‘राशन न मिलने’ की अफवाहों और मोबाइल खरीदने के दबाव के बीच खाद्य एवं रसद विभाग की दोटूक सफाई—जानें बायोमीट्रिक विफल होने पर OTP वितरण का पूरा नियम और सितंबर महीने के आंकड़े!
बिजनौर (TargetTvLive) | अवनीश त्यागी उत्तर प्रदेश के सरकारी राशन वितरण नेटवर्क को लेकर ग्रामीण और शहरी इलाकों में समय-समय पर कई तरह की भ्रांतियां और अफवाहें फैलती रहती हैं। हाल के दिनों में राशन कार्ड धारकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि ई-पॉस (e-PoS) मशीनों से राशन प्राप्त करने के लिए नया स्मार्ट फोन या मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है, अन्यथा बायोमीट्रिक न मिलने पर राशन रोक दिया जाएगा।
इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जिला पूर्ति कार्यालय, बिजनौर द्वारा एक विस्तृत प्रेस-नोट जारी कर सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया गया है। TargetTvLive के विशेष विश्लेषण में जानिए कि राशन कार्ड लाभार्थियों के लिए बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, आइरिस स्कैन (Iris Scan) और OTP आधारित वितरण व्यवस्था के क्या नियम हैं और विभाग ने इस संबंध में क्या आंकड़े पेश किए हैं।
1. त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र: तीन बार फिंगरप्रिंट, फिर आइरिस स्कैन
खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश की व्यवस्था के अनुसार उचित दर दुकानों (कोटेदार) पर ई-वेइंग स्केल (E-Weighing Scale) से जुड़ी ई-पॉस मशीनें स्थापित की गई हैं।
- बायोमीट्रिक कैप्चर: राशन लेते समय लाभार्थी का फिंगरप्रिंट यूआईडीएआई (UIDAI) सर्वर से मैच कराया जाता है।
- 3 प्रयास का नियम: यदि किसी कारणवश पहली बार में बायोमीट्रिक मिलान नहीं हो पाता, तो उसी दिन लाभार्थी को 2 अतिरिक्त मौके (कुल 3 बार) दिए जाते हैं।
- आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन: यदि तीनों बार फिंगरप्रिंट असफल रहता है, तो ई-पॉस मशीन द्वारा आइरिस स्कैन के जरिए प्रमाणीकरण की कोशिश की जाती है।
- परिवार के अन्य सदस्य को अधिकार: यदि मुख्य लाभार्थी के 3 फिंगरप्रिंट और 1 आइरिस स्कैन पूरी तरह विफल हो जाते हैं, तब भी राशन बंद नहीं होता; राशन कार्ड में दर्ज परिवार का कोई भी अन्य सदस्य स्वयं आकर यही प्रक्रिया दोहराकर राशन ले सकता है।
2. बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों के लिए OTP व्यवस्था
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)-2013 की मूल भावना यही है कि कोई भी पात्र नागरिक भोजन के अधिकार से वंचित न रहे। इसी के तहत उन राशन कार्ड धारकों के लिए मोबाइल OTP आधारित वितरण सुविधा दी गई है, जो अत्यधिक वृद्धावस्था, विकलांगता या कुष्ठ रोग जैसी शारीरिक असमर्थताओं के कारण फिंगरप्रिंट या आइरिस देने में सक्षम नहीं हैं।
- विशेष दिवस पर वितरण: ऐसे लाभार्थियों को राशन वितरण चक्र के अंतिम दिन मोबाइल OTP के जरिए राशन दिया जाता है।
- पोर्टल पर पंजीकरण: इसके लिए लाभार्थी का मोबाइल नंबर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर पूर्व से ही पंजीकृत (Registered) होना अनिवार्य है।
3. “नया मोबाइल खरीदने की जरूरत नहीं”—बिजनौर पूर्ति विभाग का स्पष्ट बयान
प्रेस नोट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राशन प्राप्त करने के लिए किसी भी लाभार्थी को नया मोबाइल खरीदने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है.
जिला पूर्ति अधिकारी, बिजनौर के अनुसार, OTP आधारित वितरण व्यवस्था कोई नई नीति नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2017 से लगातार लागू है। यह व्यवस्था केवल उन्हीं राशन कार्ड धारकों के लिए एक वैकल्पिक माध्यम है, जिनका किसी भी स्थिति में बायोमीट्रिक या आइरिस प्रमाणीकरण संभव नहीं हो पाता और जिनका नंबर पोर्टल पर पहले से दर्ज है।
4. आंकड़ों में बिजनौर की सच्चाई: OTP ट्रांजेक्शन की संख्या नगण्य
जिला पूर्ति कार्यालय बिजनौर द्वारा जारी सितंबर 2026 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जनसामान्य में फैलाई जा रही बातें जमीनी हकीकत से कितनी अलग हैं। माह सितंबर 2026 में जनपद बिजनौर के भीतर कुल 6,02,328 (छः लाख दो हजार तीन सौ अट्ठाइस) राशन कार्डों पर खाद्यान्न का वितरण संपन्न हुआ है। इसके मुकाबले मात्र 1,111 (एक हजार एक सौ ग्यारह) राशन कार्डों पर ही ओ०टी०पी० आधारित वितरण किया गया है। कुल ट्रांजेक्शन्स की संख्या के सापेक्ष यह आंकड़ा बेहद नगण्य है, जो इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि आम उपभोक्ताओं को इसके लिए किसी गैजेट या मोबाइल की कोई आवश्यकता नहीं है।
TargetTvLive का निष्कर्ष और जनहित संदेश
यदि कोई व्यक्ति या बिचौलिया राशन देने के एवज में नया मोबाइल खरीदने, अतिरिक्त शुल्क देने या किसी भ्रामक नियम का हवाला देता है, तो उस पर ध्यान न दें। उत्तर प्रदेश सरकार की वर्तमान व्यवस्था में तीन बार फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन और परिवार के अन्य सदस्यों का प्रमाणीकरण पूरी तरह से प्रभावी है।
TargetTvLive सभी राशन कार्डधारकों से अपील करता है कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
स्रोतः जिला पूर्ति कार्यालय, बिजनौर (प्रेस-नोट दिनांक 09 अक्टूबर 2026)












