बिजनौर में खनन नियमों पर उठे बड़े सवाल: नहर किनारे जेसीबी-डम्पर से खुदाई, शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ‘क्लीन चिट’ पर घिरा सिस्टम
आजमपुर उर्फ रतनगढ़ में 50 मीटर सुरक्षा नियम और हस्तचालन शर्तों की अनदेखी के आरोप, पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। जनपद बिजनौर के आजमपुर उर्फ रतनगढ़ में नहर किनारे चल रहे मिट्टी खनन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के खनन नियमों में निर्धारित सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर नहर के निकट खनन की अनुमति दी गई। शिकायतों के बाद खान निरीक्षक, तहसील प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त निरीक्षण कर खनन को नियमसम्मत बताते हुए क्लीन चिट दे दी, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों के सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
विवाद का एक और अहम पहलू यह है कि जिस खनन कार्य को शिकायतकर्ता हस्तचालन (Manual Excavation) की शर्तों के विपरीत बता रहे हैं, वहां कथित रूप से जेसीबी मशीनों और डम्परों जैसी भारी मशीनों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। यदि अनुमति वास्तव में केवल हस्तचालित खनन की थी, तो भारी मशीनों के उपयोग की अनुमति किस आधार पर दी गई—यह सवाल अब पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गया है।
क्या कहते हैं नियम?
उत्तर प्रदेश के माइनर मिनरल कंसेशन नियमों के अनुसार नहर, रजवाहा अथवा अन्य सार्वजनिक संरचनाओं के निकट खनन के लिए सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। निर्धारित दूरी के भीतर खनन केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और निर्धारित शर्तों के अधीन ही किया जा सकता है। यदि अनुमति में हस्तचालित खनन का उल्लेख हो, तो भारी मशीनों का उपयोग भी जांच का विषय बन सकता है।
ग्रामीणों के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि नहर के बेहद निकट जेसीबी मशीनों से मिट्टी की खुदाई कर डम्परों के माध्यम से उसका परिवहन किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे नहर के तटबंध की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और भविष्य में सिंचाई व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई के स्थान पर संबंधित विभागों ने खनन को सही बताते हुए मामले को समाप्त करने का प्रयास किया।
क्लीन चिट के बाद उठे नए सवाल
यदि निरीक्षण में सब कुछ नियमों के अनुरूप पाया गया, तो क्या अधिकारियों ने यह भी सत्यापित किया कि—
- नहर से निर्धारित दूरी का पालन हुआ?
- अनुमति की सभी शर्तों का अनुपालन किया गया?
- क्या हस्तचालित खनन की अनुमति होने पर भी जेसीबी और डम्परों का उपयोग किया गया?
- यदि मशीनों का उपयोग हुआ, तो उसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी?
इन सवालों के जवाब सामने आए बिना पूरे मामले पर उठ रहे संदेह समाप्त होना मुश्किल दिखाई देता है।
विशेषज्ञों की राय
खनन और सिंचाई क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नहरों के समीप भारी मशीनों से खुदाई मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन और नियमित तकनीकी निरीक्षण आवश्यक होता है।
प्रशासन से पारदर्शिता की अपेक्षा
यदि प्रशासन का दावा है कि पूरा खनन कार्य नियमों के अनुरूप हुआ है, तो जनहित में अनुमति आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, नहर से दूरी का मापन, मशीनों के उपयोग से संबंधित अनुमति (यदि कोई हो) तथा संबंधित विभागों की संस्तुतियां सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जनहित का सवाल
यह मामला केवल एक खनन पट्टे का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन का भी है। यदि नियमों का पालन हुआ है तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक होने चाहिए, और यदि कहीं उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
TargetTvLive इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, खनन विभाग, सिंचाई विभाग और पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है। संबंधित विभाग यदि अपना स्पष्टीकरण या दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं, तो उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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