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गंगा एक्सप्रेस-वे पर बड़ा विवाद: हजारों किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहण के दायरे में, सीएम योगी से रूट बदलने की मांग

गंगा एक्सप्रेस-वे का रूट बदलने की मांग तेज: किसानों ने सीएम योगी से लगाई गुहार, कहा- उपजाऊ जमीन बचाएं, पर्यटन स्थलों को जोड़ें

बिजनौर में गंगा एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित एलाइनमेंट को लेकर किसानों और क्षेत्रवासियों का विरोध, हजारों किसानों की जमीन प्रभावित होने का दावा

बिजनौर। अमरोहा से हरिद्वार तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट (संरेखण) को लेकर बिजनौर में किसानों और क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि एक्सप्रेस-वे का प्रस्तावित मार्ग बदला जाए, ताकि हजारों किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि बचाई जा सके और क्षेत्र के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को भी इसका लाभ मिल सके।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्तमान प्रस्तावित एलाइनमेंट बिजनौर के कई गांवों की प्रथम श्रेणी की अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि से होकर गुजर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसान प्रभावित होंगे। किसानों ने सरकार से जनहित में पुनर्विचार कर नया मार्ग निर्धारित करने की अपील की है।

किन गांवों की जमीन प्रभावित होने की आशंका?

ज्ञापन के अनुसार प्रस्तावित एलाइनमेंट बिजनौर शहर के निकट स्थित सालाबाद, मैरा, भोगी, नसीरी, पैदा, कल्लूपुरा, नया गांव, गजरौला अचपल, गजरौला शिव तथा बगीची सहित कई गांवों की कृषि भूमि से होकर गुजर सकता है। किसानों का दावा है कि यह भूमि अत्यंत उपजाऊ है और इसके अधिग्रहण से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

किसानों ने सुझाया वैकल्पिक मार्ग

ज्ञापन में किसानों और क्षेत्रवासियों ने सुझाव दिया है कि गंगा एक्सप्रेस-वे का मार्ग ऐसा बनाया जाए जो बिजनौर की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को जोड़ सके। उन्होंने मांग की है कि एक्सप्रेस-वे को महात्मा विदुर जी की कुटी, महर्षि कण्व आश्रम और कल्यवा देवी मंदिर से जोड़ते हुए विकसित किया जाए।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि ऐसा किया जाता है तो धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय व्यापार मजबूत होगा और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

सरकारी भूमि के उपयोग का दिया सुझाव

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वैकल्पिक एलाइनमेंट में अधिकतम सरकारी भूमि का उपयोग संभव है। साथ ही जिन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी, वहां अपेक्षाकृत कम मूल्य वाली तृतीय श्रेणी की भूमि प्रभावित होगी। इससे किसानों को कम नुकसान होगा और परियोजना का कार्य भी सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगा।

मुख्यमंत्री से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले किसानों और क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे मामले में सकारात्मक निर्णय लें। उनका कहना है कि यदि सरकार किसानों की मांग पर विचार करती है तो क्षेत्र के हजारों किसान और ग्रामीण स्वयं को सम्मानित महसूस करेंगे तथा विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित हो सकेगा।

विकास बनाम कृषि भूमि का सवाल

गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है और इससे प्रदेश में कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। हालांकि बिजनौर में उठी यह मांग एक बार फिर विकास परियोजनाओं और कृषि भूमि संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने ला रही है। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर किसानों की इस मांग को कितना महत्व दिया जाता है।

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अस्वीकरण: यह समाचार क्षेत्रवासियों एवं किसानों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन के आधार पर तैयार किया गया है। एलाइनमेंट संबंधी अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी विभागों एवं शासन स्तर पर लिया जाएगा।

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