Target Tv Live

20 साल से गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ उठा रहीं आशाएं अब सड़क पर उतरेंगी, ₹24 हजार वेतन और पेंशन समेत 11 मांगों पर बिगुल

20 साल से गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ उठा रहीं आशाएं अब सड़क पर उतरेंगी, ₹24 हजार वेतन और पेंशन समेत 11 मांगों पर बिगुल

9 जुलाई को देशभर में होगा बड़ा प्रदर्शन, बिजनौर में भी जिला मुख्यालय पर गरजेंगी आशा और आशा संगिनी
विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | Target TV Live

बिजनौर। गांवों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर बच्चों के टीकाकरण, संक्रामक रोगों की रोकथाम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर पहुंचाने तक, आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ता पिछले दो दशकों से स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव बनी हुई हैं। लेकिन अब वही आशा कार्यकर्ता अपने हक और सम्मान की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही हैं।

अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय आह्वान पर 9 जुलाई 2026 को देशभर के जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित की जाएगी। बिजनौर में भी आशा और आशा संगिनी कर्मचारी संगठन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की रूपरेखा से अवगत कराया है।

यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं की आवाज है जो वर्षों से कम मानदेय में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा दायित्व निभा रही हैं।


“काम बढ़ता गया, लेकिन सम्मान और वेतन नहीं”

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2005 में जब आशा व्यवस्था शुरू हुई थी, तब उनकी जिम्मेदारियां सीमित थीं। लेकिन आज मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, पोषण अभियान, संचारी रोग नियंत्रण, आयुष्मान भारत, ई-कवच पोर्टल और दर्जनों योजनाओं का बोझ उन्हीं के कंधों पर है।

संगठन का दावा है कि पिछले 20 वर्षों में काम का दायरा कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन आर्थिक स्थिति आज भी वैसी ही बनी हुई है। यही कारण है कि अब आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ता आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में दिखाई दे रही हैं।


सरकार के सामने रखी गईं 11 बड़ी मांगें

आंदोलन के केंद्र में वे मांगें हैं जिन्हें आशा कार्यकर्ता अपने भविष्य और सम्मान से जुड़ा मानती हैं।

सबसे बड़ी मांग — राज्य कर्मचारी का दर्जा

संगठन चाहता है कि आशा कार्यकर्ताओं को संविदा या प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था से बाहर निकालकर राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।

इसके साथ ही—

  • आशा कार्यकर्ताओं को ₹18,000 मासिक वेतन
  • आशा संगिनी को ₹24,000 मासिक वेतन
  • वर्तमान प्रोत्साहन राशि को तीन गुना करने
  • EPF और ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा
  • प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
  • सेवानिवृत्ति पर ₹10 लाख की सहायता
  • न्यूनतम ₹5,000 मासिक पेंशन

जैसी मांगें प्रमुख रूप से उठाई गई हैं।


मौत पर मुआवजा और परिवार को नौकरी की भी मांग

आशा संगठन ने मांग की है कि यदि किसी आशा या आशा संगिनी की कार्यकाल के दौरान आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।

संगठन का तर्क है कि कोरोना महामारी के दौरान कई आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया था, लेकिन उनके लिए पर्याप्त सुरक्षा और भविष्य की गारंटी आज भी नहीं है।


डिजिटल काम बढ़ा, लेकिन संसाधन नहीं

सरकार की अधिकांश स्वास्थ्य योजनाएं अब ऑनलाइन हो चुकी हैं। ई-कवच जैसे पोर्टलों पर लगातार डेटा फीडिंग और अपडेट का काम किया जा रहा है।

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि—

  • उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला,
  • कई मोबाइल खराब हो चुके हैं,
  • इंटरनेट रिचार्ज का खर्च भी परेशानी का कारण बनता है।

इसीलिए संगठन ने सभी आशा और आशा संगिनी को नया 5G मोबाइल और सरकारी खर्च पर रिचार्ज सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है।


9 जुलाई को क्या होगा?

प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत बिजनौर में आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ता पहले एकत्र होंगी, इसके बाद रैली निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचेंगी और प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपेंगी।

संगठन को उम्मीद है कि यह आंदोलन सरकार का ध्यान उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं की ओर आकर्षित करेगा।


स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?

विशेषज्ञों का मानना है कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि उनका असंतोष बढ़ता है तो इसका असर सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

गांवों में प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण, पोषण कार्यक्रम, नवजात देखभाल और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे अधिकांश कार्य आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही संचालित होते हैं। ऐसे में उनकी मांगों का समाधान केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र का मुद्दा माना जा रहा है।


सवाल जो सरकार के सामने खड़े हैं

  • क्या आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलेगा?
  • क्या मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी होगी?
  • क्या सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की मांग पूरी होगी?
  • क्या 9 जुलाई का आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा दबाव बना पाएगा?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के बीच होने वाली बातचीत तय करेगी।


Target TV Live Analysis

देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव मानी जाने वाली आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन केवल वेतन वृद्धि की मांग नहीं है। यह सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की गारंटी की मांग भी है। यदि लाखों स्वास्थ्य कर्मियों की इन आवाजों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो 9 जुलाई का आंदोलन आने वाले समय में एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे का रूप ले सकता है।

#AshaWorkers #AshaSangini #AshaAndolan #BijnorNews #UPNews #HealthWorkers #BreakingNews #TargetTVLive #AvnishTyagi #GoogleDiscover #TrendingNews #HealthDepartment #ViralNews #HindiNews #LatestNews #AshaMahasangh

Leave a Comment

यह भी पढ़ें