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“DM की सख्ती के बावजूद बेखौफ खनन माफिया! दबिश से पहले कौन कर देता है अलर्ट?”

बिजनौर में अवैध खनन पर सख्ती के दावे, लेकिन कार्रवाई से पहले कैसे लीक हो जाती है सूचना?

खनन माफियाओं तक पहले पहुंच जाती है दबिश की खबर! खान निरीक्षक की गाड़ी तक ट्रैक करने के आरोप, फिर भी कार्रवाई न होने से उठ रहे सवाल
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन लगातार सख्ती के दावे कर रहा है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भी संयुक्त चेकिंग, जीपीएस निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आती है।

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा और शिकायत सामने आती रही है कि अवैध खनन की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचने के बावजूद कई मामलों में समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कार्रवाई के लिए निकलने वाली टीमों की गतिविधियों की जानकारी पहले ही खनन माफियाओं तक पहुंच जाती है, जिसके कारण मौके पर पहुंचने तक अधिकांश स्थान खाली मिलते हैं।

क्या पहले ही लीक हो जाती है दबिश की सूचना?

क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि खनन से जुड़े कुछ प्रभावशाली तत्व प्रवर्तन टीमों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। यहां तक कि यह आरोप भी लगाए जाते रहे हैं कि खान विभाग की गाड़ियों की लोकेशन तक ट्रैक की जाती है और टीम के रवाना होते ही संबंधित लोगों को सूचना पहुंच जाती है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्रवाई की गोपनीयता और प्रभावशीलता पर भी बड़ा सवाल है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहस जरूर छेड़ दी है।

शिकायतकर्ताओं में बढ़ रही निराशा

ग्रामीण क्षेत्रों और नदी किनारे बसे इलाकों से कई बार अवैध खनन की शिकायतें किए जाने की बात सामने आती है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी मौके पर कार्रवाई नहीं होती या फिर कार्रवाई इतनी देर से होती है कि संबंधित लोग पहले ही वहां से हट जाते हैं।

यही वजह है कि अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सिर्फ GPS नहीं, सूचना तंत्र की भी जांच जरूरी

प्रशासन ने खनन वाहनों में GPS लगाने का निर्णय लिया है, जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्रवाई से जुड़ी सूचनाएं ही लीक होती रहेंगी तो केवल GPS व्यवस्था से समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं होगा।

आवश्यक है कि—

  • कार्रवाई से पहले सूचना लीक होने की शिकायतों की जांच हो।
  • प्रवर्तन टीमों की गतिविधियों की गोपनीयता सुनिश्चित की जाए।
  • संवेदनशील मामलों में अलग-अलग विभागों की संयुक्त एवं आकस्मिक कार्रवाई की जाए।
  • सरकारी वाहनों और अधिकारियों की निगरानी करने वाले तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो।
  • शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए।

गैर-पंजीकृत वाहनों पर भी बने स्पष्ट नीति

अवैध खनन के खिलाफ अभियान तब और प्रभावी होगा जब गैर-पंजीकृत, गैर-व्यावसायिक और संदिग्ध वाहनों द्वारा खनिज परिवहन पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल वैध खनन वाहनों की जांच से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर कार्रवाई करनी होगी।

बड़ा सवाल

बिजनौर में अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए लगातार बैठकें और निर्देश जारी हो रहे हैं, लेकिन यदि सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं होती और दबिश से पहले ही माफियाओं तक खबर पहुंच जाती है, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब देखना होगा कि प्रशासन केवल निर्देशों तक सीमित रहता है या सूचना लीक, संदिग्ध ट्रैकिंग और गैर-कानूनी परिवहन के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराकर ठोस कार्रवाई करता है।

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