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बिजनौर में कुपोषण पर बड़ा एक्शन! DM ने हर ब्लॉक के 2 गांव किए चिन्हित, बच्चों की होगी विशेष निगरानी

बिजनौर में कुपोषण पर बड़ा एक्शन! DM ने हर ब्लॉक के 2 गांव किए चिन्हित, बच्चों की होगी विशेष निगरानी

‘कुपोषण पर अब नहीं चलेगी ढिलाई’, बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक के स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रशासन ने कसी कमर
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद में कुपोषण के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई शुरू होने जा रही है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने साफ शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कुपोषण के मामलों को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार दिखाई देना चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रत्येक विकासखंड में दो गांवों का चयन कर विशेष पोषण अभियान चलाया जाएगा।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला पोषण समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने कुपोषण की स्थिति की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर कुपोषित (SAM) और मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान कर उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर पर विशेष निगरानी रखी जाए।


घर-घर पहुंचेगी टीम, हर बच्चे की होगी निगरानी

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चयनित गांवों में कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की जाए और उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच कराई जाए। बच्चों का वजन, लंबाई और पोषण स्तर लगातार दर्ज किया जाए ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) से भी जोड़ा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर ऐसे बच्चों के स्वास्थ्य में स्पष्ट सुधार दिखाई दे।

आंगनबाड़ी केंद्रों की बढ़ेगी जवाबदेही

बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाए और जहां काम की गति धीमी है, वहां विशेष अभियान चलाकर सुधार किया जाए।

उन्होंने कहा कि कुपोषण से लड़ाई में आंगनबाड़ी केंद्र सबसे अहम कड़ी हैं और इनके माध्यम से ही बच्चों, किशोरियों और माताओं तक पोषण योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है।

डेटा से नहीं, धरातल पर दिखेगा बदलाव

बैठक के दौरान पोषण ट्रैकर, ई-कवच पोर्टल, पोषाहार वितरण, सैम बच्चों की स्थिति, एनआरसी रेफरल और वजन मशीनों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेताया कि पोर्टलों पर सही और समय पर फीडिंग सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

किशोरियां, गर्भवती और धात्री महिलाएं भी अभियान के केंद्र में

यह अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन ने किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार को भी प्राथमिकता दी है। इसके लिए स्वास्थ्य, बाल विकास और अन्य विभाग मिलकर समन्वित तरीके से काम करेंगे।

क्यों अहम है यह पहल?

विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि सामाजिक विकास का भी बड़ा मुद्दा है। कुपोषित बच्चे शारीरिक और मानसिक विकास में पीछे रह जाते हैं, जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में गांव स्तर पर लक्षित अभियान चलाने का फैसला बिजनौर में कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

यदि प्रशासन की यह रणनीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले महीनों में हजारों बच्चों, किशोरियों और माताओं के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

बैठक के प्रमुख फैसले एक नजर में

🔹 हर विकासखंड में 2 गांवों का चयन
🔹 सैम और मैम बच्चों की विशेष पहचान और निगरानी
🔹 नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, वजन और लंबाई मापन
🔹 गंभीर बच्चों को चिकित्सा सहायता और एनआरसी से जोड़ना
🔹 आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण
🔹 पोषण ट्रैकर और ई-कवच पोर्टल पर समयबद्ध फीडिंग
🔹 बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष फोकस

“कुपोषण मुक्त बिजनौर” की दिशा में प्रशासन का बड़ा कदम

जिलाधिकारी जसजीत कौर के नेतृत्व में शुरू होने जा रहा यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और मजबूत बनाने की मुहिम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासनिक निर्देश गांवों तक कितनी तेजी और प्रभावशीलता से पहुंचते हैं।

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