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खेत बचाओ अभियान से बदलेगी खेती की तस्वीर! बिजनौर में किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का मंत्र

खेत बचाओ अभियान से बदलेगी खेती की तस्वीर! बिजनौर में किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का मंत्र, आय बढ़ाने पर फोकस

विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026 के तहत गांव-गांव पहुंच रहे वैज्ञानिक, किसानों को दी जा रही आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती की जानकारी

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। खेती को लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार का “विकसित कृषि संकल्प अभियान-2026” अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी रूप से दिखाई देने लगा है। बिजनौर जनपद में कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग, गन्ना, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और सिंचाई विभाग के संयुक्त प्रयासों से किसानों को वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक कृषि और लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने की नई तकनीकों से जोड़ने का अभियान तेज कर दिया गया है।

इसी क्रम में विकास खंड किरतपुर के छह गांवों में आयोजित गोष्ठियों में अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती के बदलते स्वरूप और नई चुनौतियों के बीच टिकाऊ खेती के उपाय बताए। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक और बाजार आधारित कृषि प्रणाली से जोड़ना है।

खेती को बचाने और किसानों की आय बढ़ाने की दोहरी रणनीति

कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि आज के समय में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाना और खेती की लागत कम करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद, प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग ने कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित किया है। ऐसे में “खेत बचाओ अभियान” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य की कृषि सुरक्षा का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने बताया खेती का नया मॉडल

गोष्ठियों में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। बीज उपचार, जैव उर्वरकों का प्रयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM), एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM), संसाधन संरक्षण तकनीक और उन्नत सिंचाई प्रणालियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसान इन तकनीकों को अपनाते हैं तो उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

प्राकृतिक खेती और हरी खाद पर विशेष जोर

अभियान के दौरान किसानों को यह भी समझाया गया कि प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्प केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और लंबे समय में खेती अधिक लाभकारी बनती है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को हरी खाद, जैविक खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील भी की गई।

एफपीओ मॉडल बना किसानों के लिए नई उम्मीद

कार्यक्रम में एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) की भूमिका भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। गोष्ठी में बताया गया कि एफपीओ के माध्यम से मक्का और अन्य फसलों से साइलेज तैयार कर पशुओं के लिए वैकल्पिक चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल पशुपालकों को राहत मिल रही है बल्कि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एफपीओ मॉडल को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए तो छोटे और सीमांत किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

क्यों महत्वपूर्ण है विकसित कृषि संकल्प अभियान?

भारत की कृषि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ती उत्पादन लागत और घटती भूमि उर्वरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में विकसित कृषि संकल्प अभियान किसानों को नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक सलाह से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है।

बिजनौर में आयोजित यह अभियान इस बात का संकेत है कि सरकार अब केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वैज्ञानिकों और अधिकारियों को सीधे गांवों तक पहुंचाकर किसानों के बीच व्यवहारिक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है।

निष्कर्ष

यदि किसान मृदा परीक्षण आधारित खेती, जैविक विकल्पों, आधुनिक कृषि तकनीकों और एफपीओ मॉडल को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में खेती की लागत कम होने, उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि होने की संभावना मजबूत हो सकती है। बिजनौर में शुरू हुआ यह प्रयास प्रदेश की कृषि व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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