“अब चुप नहीं बैठेंगे पेंशनर!” बिजनौर से सरकार को सीधी चेतावनी, 8वें वेतन आयोग, डीए एरियर और रेल छूट पर गरजी आवाज
‘कोरोना काल का बकाया दो, पेंशन बढ़ाओ, वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान लौटाओ’— सेवानिवृत्त कर्मचारियों का बड़ा संदेश
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। महंगाई की मार, बढ़ते इलाज के खर्च और लगातार उपेक्षा से नाराज पेंशनरों का सब्र अब जवाब देने लगा है। बिजनौर में बुधवार को हुई सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन की मासिक बैठक में सरकार के सामने मांगों का ऐसा पुलिंदा रखा गया, जिसने साफ संकेत दे दिया कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो पेंशनर सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
पुराना महिला चिकित्सालय, सिविल लाइन परिसर में आयोजित बैठक में जिले भर से पहुंचे सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को नजरअंदाज करना बंद करे और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय ले।
8वें वेतन आयोग में पुराने पेंशनरों को शामिल करने की जोरदार मांग
बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला अध्यक्ष शिव ध्यान सिंह ने कहा कि वित्त विधेयक-2025 के कुछ प्रावधान पेंशनरों के बीच अनावश्यक भेदभाव पैदा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पुराने पेंशनरों को भी बिना किसी भेदभाव के 8वें वेतन आयोग के लाभ की परिधि में लाया जाए।
उन्होंने कहा कि देश की सेवा में जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद उपेक्षा नहीं बल्कि सम्मान मिलना चाहिए।
18 महीने का डीए एरियर बना सबसे बड़ा मुद्दा
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई राहत (डीए) एरियर को लेकर हुई। जिला मंत्री योगेश्वर ने कहा कि लाखों पेंशनर वर्षों से अपने बकाये का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले पाई है।
उन्होंने कहा कि यह रकम पेंशनरों का अधिकार है, कोई उपकार नहीं।
65 साल के बाद बढ़े पेंशन, आयकर से मिले राहत
पेंशनरों ने मांग उठाई कि 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंशन में 5 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित की जाए। उनका तर्क था कि उम्र बढ़ने के साथ चिकित्सा और दैनिक जरूरतों पर खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
इसके साथ ही पेंशन को आयकर के दायरे से बाहर रखने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
रेल किराए में फिर मिले 50 प्रतिशत छूट
बैठक में वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे यात्रा में पहले की तरह 50 प्रतिशत रियायत बहाल करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने यह सुविधा समाप्त कर बुजुर्गों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
आयुष्मान योजना की सीमा बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग
संरक्षक शशिकांत मिश्रा ने कहा कि आज गंभीर बीमारियों का इलाज लाखों रुपये में हो रहा है। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना की वर्तमान सीमा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कैशलेस इलाज की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग उठाई।
साथ ही यह भी कहा गया कि महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने पर उसे मूल पेंशन में समाहित किया जाए।
“संघर्ष के लिए तैयार रहिए”— बैठक में गूंजा संदेश
बैठक के अंत में जिला अध्यक्ष शिव ध्यान सिंह ने संगठन के सदस्यों से कहा कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों को अनदेखा करती है तो बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के अधिकारों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है और संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए तैयार है।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर की यह बैठक केवल एक नियमित संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि पेंशनरों के बढ़ते असंतोष का सार्वजनिक प्रदर्शन भी थी। 8वें वेतन आयोग, 18 महीने के डीए एरियर, आयुष्मान योजना, रेलवे रियायत और पेंशन वृद्धि जैसे मुद्दे देशभर के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े हैं।
ऐसे में यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं की तो आने वाले समय में पेंशनरों का आंदोलन एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में उभर सकता है।
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