“अहिंसा, करुणा, मानवता हमारे आभूषण हैं, किन्तु शस्त्र उठाना होगा यदि सामने खर-दूषण हैं”
बिजनौर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा संदेश, रामायण के प्रसंग से बताया राष्ट्र और समाज रक्षा का धर्म
विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक देने पहुंचे सीएम ने शांति, सुरक्षा और सनातन मूल्यों पर रखा स्पष्ट पक्ष
अवनीश त्यागी | बिजनौर
बिजनौर के आलमपुर गावड़ी में 1645 विस्थापित परिवारों को भूमि का मालिकाना हक सौंपने के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक कथन पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा बन गया। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा—
“अहिंसा, करुणा और मानवता हमारे आभूषण हैं, किन्तु शस्त्र उठाना होगा यदि सामने खर-दूषण हैं।”
मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य को राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हजारों लोगों की मौजूदगी में दिए गए इस संदेश को केवल एक धार्मिक संदर्भ नहीं बल्कि राष्ट्र, समाज और संस्कृति की रक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
रामायण के पात्रों के माध्यम से दिया संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल स्वभाव अहिंसा, करुणा, दया और मानवता रहा है। यही कारण है कि भारत ने सदैव विश्व को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया है।
लेकिन उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि जब समाज और राष्ट्र के सामने ऐसे तत्व खड़े हों जो व्यवस्था, संस्कृति और सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएं, तब केवल उपदेश या सहनशीलता पर्याप्त नहीं होती।
रामायण में खर और दूषण राक्षसों का उल्लेख करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि भगवान राम ने भी पहले धर्म और मर्यादा का पालन किया, लेकिन जब अत्याचार अपनी सीमा पार कर गया तो अधर्म के विरुद्ध शस्त्र उठाना पड़ा।
मुख्यमंत्री का यह कथन श्रोताओं के बीच जोरदार तालियों के साथ स्वागत का विषय बना।
शांति की वकालत, लेकिन सुरक्षा पर समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह संदेश देने का प्रयास किया कि उत्तर प्रदेश सरकार विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता के साथ-साथ कानून व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं है, लेकिन अपराध, अराजकता और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति जारी रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान उनके उस दृष्टिकोण को भी दर्शाता है जिसमें वे कानून व्यवस्था को विकास की पहली शर्त मानते हैं।
भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर दिया जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की पहचान केवल आर्थिक शक्ति से नहीं बल्कि उसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से भी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे विचारों को अपनाया है। अहिंसा और करुणा भारतीय जीवन दर्शन के प्रमुख आधार हैं, लेकिन इन मूल्यों की रक्षा के लिए सामर्थ्य और साहस भी उतना ही आवश्यक है।
उनके अनुसार करुणा का अर्थ कायरता नहीं और अहिंसा का अर्थ अन्याय के सामने समर्पण नहीं हो सकता।
विस्थापित परिवारों के कार्यक्रम में दिया व्यापक संदेश
मुख्यमंत्री का यह वक्तव्य ऐसे समय आया जब वह तीन पीढ़ियों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे 1645 विस्थापित परिवारों को भूमि का स्वामित्व सौंप रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को वर्षों पहले अपनी भूमि और संपत्ति छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था, उन्हें न्याय दिलाना सरकार का दायित्व था। यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय, सुरक्षा और सम्मान किसी भी सभ्य समाज के मूल स्तंभ हैं और सरकार इन्हीं मूल्यों के आधार पर कार्य कर रही है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कथन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी चर्चा का केंद्र बना रहा। समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति और राष्ट्र सुरक्षा के बीच संतुलन का संदेश बताया, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मुख्यमंत्री की वैचारिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत माना।
बिजनौर की ऐतिहासिक धरती से दिया गया यह संदेश केवल एक भाषण का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि शांति, करुणा, न्याय और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिरोध की भारतीय अवधारणा को नए सिरे से रेखांकित करने वाला वक्तव्य बन गया।
मुख्य अंश
“अहिंसा, करुणा और मानवता हमारे आभूषण हैं, किन्तु शस्त्र उठाना होगा यदि सामने खर-दूषण हैं।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
यह एक ऐसा वाक्य रहा जिसने पूरे कार्यक्रम की दिशा और संदेश को परिभाषित किया तथा बिजनौर की सभा से प्रदेश और देश को एक व्यापक वैचारिक संदेश देने का काम किया।












