‘गाय हमारे लिए पशु नहीं, मां है’ : बिजनौर से सीएम योगी का बड़ा संदेश, गौमाता पर दिया भावुक और तीखा बयान
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रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिजनौर दौरे में कानून-व्यवस्था, अपराध और विकास के मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण बातें हुईं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की रही जिसमें उन्होंने गौमाता को लेकर अपनी भावनाएं और सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा। मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय को केवल एक पशु मानना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की मूल भावना को न समझ पाने जैसा है।
‘गाय हमारे लिए पशु नहीं, हमारी माता है’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग आज गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि करोड़ों भारतीयों के लिए गाय किसी सरकारी घोषणा की मोहताज नहीं है।
उन्होंने कहा—
“गाय हमारे लिए पशु नहीं, हमारी माता है। मां और बेटे के रिश्ते को किसी सरकारी आदेश, कागज या घोषणा की आवश्यकता नहीं होती। यह हमारी आस्था, हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों का विषय है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज में गौमाता का सम्मान हजारों वर्षों से होता आया है और यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व का विषय भी है।
‘जो गाय को सिर्फ पशु मानते हैं, उन्हें भारतीय संस्कृति को समझने की जरूरत’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग गाय को केवल एक पशु के रूप में देखते हैं, वे भारतीय जीवन दर्शन और सनातन संस्कृति की गहराई को नहीं समझ पाए हैं।
उन्होंने कहा कि गांव, किसान और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में गौवंश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गाय केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मा है।
गौमाता पर बयान के बाद गूंजा पंडाल
मुख्यमंत्री के गौमाता संबंधी बयान के दौरान जनसभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। उनके इस वक्तव्य को बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के सम्मान से जोड़कर देखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत मूल्यों को भी रेखांकित किया।
योगी का संदेश: गौसेवा केवल आस्था नहीं, संस्कृति की रक्षा का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौसंरक्षण और गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार गौवंश संरक्षण और किसानों के हितों से जुड़े विषयों को गंभीरता से आगे बढ़ाती रहेगी।
बिजनौर की धरती से मुख्यमंत्री का यह संदेश साफ था कि “गौमाता भारतीय समाज की आस्था का केंद्र हैं और उनका सम्मान किसी सरकारी दर्जे से नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा से तय होता है।”












