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झोलाछाप डॉक्टरों का ‘सुरक्षा कवच’ बना स्वास्थ्य विभाग? वायरल वीडियो से खुली परतें

रिश्वतखोरी का वायरल वीडियो बना स्वास्थ्य विभाग के ‘काले खेल’ का आईना! बिजनौर में नोडल क्वेक्स पर अवैध उगाही के गंभीर आरोप

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के नाम पर वसूली का खेल?, वायरल वीडियो के बाद खुलने लगीं विभागीय परतें

बिजनौर। बिजनौर स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए रिश्वतखोरी के वीडियो ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिले में वर्षों से फल-फूल रहे कथित ‘क्वेक्स नेटवर्क’ और उससे जुड़े अवैध उगाही तंत्र की भी पोल खोल दी है।

नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के समीपुर स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद देशवाल का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह कथित रूप से एक झोलाछाप डॉक्टर से पांच हजार रुपये लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित झोलाछाप डॉक्टर यह कहते हुए सुनाई देता है कि “तेरे पास तीन-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं”, जिससे अवैध लेनदेन और दबाव की आशंका और गहरा गई है।

“कार्रवाई नहीं, केवल अवैध उगाही” — विभाग पर गंभीर आरोप

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई न होने के पीछे कथित रूप से विभागीय संरक्षण और अवैध उगाही का खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप यह भी हैं कि “नोडल क्वेक्स” का चार्ज लेने के लिए राजनीतिक गठजोड़ और आर्थिक लेनदेन तक किए जाते हैं।

चर्चाएं यहां तक हैं कि विभाग के कई अधिकारी इस पूरी व्यवस्था से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। यही कारण माना जा रहा है कि वर्षों से जिले में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कोई बड़ी और स्थायी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

दो माह पहले हुई थी क्वेक्स की गोली मारकर हत्या

यह भी उल्लेखनीय है कि लगभग दो माह पूर्व जिले में एक कथित क्वेक्स द्वारा दूसरे क्वेक्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठे थे कि आखिर बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों और क्लीनिकों का इतना बड़ा नेटवर्क किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है।

घटना के बाद प्रशासन ने अपनी कार्यशैली पर उठ रहे सवालों को शांत करने के लिए नगीना क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया था। हालांकि यह अभियान भी सवालों के घेरे में आ गया।

“ढांक के तीन पात” साबित हुआ अभियान!

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान में केवल आठ गैर-पंजीकृत अस्पतालों और क्लीनिकों पर कार्रवाई की गई थी, जबकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिले में ऐसे सैकड़ों क्लीनिक और अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।

आरोप यह भी हैं कि कार्रवाई के बजाय कथित रूप से लाखों रुपये की अवैध उगाही कर विभागीय जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है।

डीएम जसजीत कौर ने लिया सख्त संज्ञान

पूरा मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी जसजीत कौर ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

डीएम के अनुसार आरोपी डॉक्टर का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनके लेनदेन और कार्यप्रणाली की जांच के लिए समिति का गठन भी कर दिया गया है। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी शासन स्तर पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

जनता पूछ रही — आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा नेटवर्क?

वायरल वीडियो के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है? यदि विभागीय अधिकारी कार्रवाई के बजाय कथित रूप से वसूली में लगे थे, तो आम लोगों की जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति और अवैध चिकित्सा कारोबार के बीच यह मामला अब केवल एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है।

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रिपोर्ट : अवनीश त्यागी, TargetTvLive

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